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शुक्रवार, 22 जून 2012

दोहावली .... भाग -- 17 / संत कबीर

जन्म  --- 1398

निधन ---  1518


काया काढ़ा काल घुन, जतन-जतन सो खाय ।


काया बह्रा ईश बस, मर्म न काहूँ पाय ॥ 161 ॥



कहा कियो हम आय कर, कहा करेंगे पाय ।


इनके भये न उतके, चाले मूल गवाय ॥ 162 ॥



कुटिल बचन सबसे बुरा, जासे होत न हार ।


साधु वचन जल रूप है, बरसे अम्रत धार ॥ 163 ॥



कहता तो बहूँना मिले, गहना मिला न कोय ।


सो कहता वह जान दे, जो नहीं गहना कोय ॥ 164 ॥



कबीरा मन पँछी भया, भये ते बाहर जाय ।


जो जैसे संगति करै, सो तैसा फल पाय ॥ 165 ॥



कबीरा लोहा एक है, गढ़ने में है फेर ।


ताहि का बखतर बने, ताहि की शमशेर ॥ 166 ॥



कहे कबीर देय तू, जब तक तेरी देह ।


देह खेह हो जाएगी, कौन कहेगा देह ॥ 167 ॥



करता था सो क्यों किया, अब कर क्यों पछिताय ।


बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय ॥ 168 ॥



कस्तूरी कुन्डल बसे, म्रग ढ़ूंढ़े बन माहिं ।


ऐसे घट-घट राम है, दुनिया देखे नाहिं ॥ 169 ॥



कबीरा सोता क्या करे, जागो जपो मुरार ।


एक दिना है सोवना, लांबे पाँव पसार ॥ 170 ॥


क्रमश:



10 टिप्‍पणियां:

  1. बात बात में दे गये, परम सत्य का ज्ञान।
    कबिरा अद्भुत ग्रंथ हैं, कबिरा हीरक खान॥


    सादर आभार।

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  2. कस्तूरी कुन्डल बसे, म्रग ढ़ूंढ़े बन माहिं ।
    ऐसे घट-घट राम है, दुनिया देखे नाहिं ॥

    वाह ...ज्ञान की गंगा ...
    आभार ..संगीता दी ..

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  3. कबीरा सोता क्या करे, जागो जपो मुरार ।
    एक दिना है सोवना, लांबे पाँव पसार ॥ 170 ॥
    एक शाश्वत सत्य को सामने रख दिया कबीर ने .बढ़िया प्रस्तुति सार्वकालिक .

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  4. कुटिल बचन सबसे बुरा, जासे होत न हार ।
    साधु वचन जल रूप है, बरसे अम्रत धार ॥
    वाह वाह वाह ..

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  5. कबीरा सोता क्या करे, जागो जपो मुरार ।
    एक दिना है सोवना, लांबे पाँव पसार ॥ 170 ॥

    एक कटु सत्य...मगर बहुत जरूरी जागने के लिये..आभार!

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  6. कबीर सर्वकालिक प्रेरणा के स्रोत हैं।

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  7. .अमूल्य धरोहर साझा करने के लिए आभार

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  8. अद्भुत दोहे....साझा करने के लिए आभार

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