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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

हुए अमीर / गरीबी पर लिख / क्या तकदीर।


पिछली बार अपने कुछ हाइकु पढवाया था,  जिन्हें आप यहाँ पढ सकते हैं। आज फिर कुछ हाइकु आपसे बाँट रहा हूँ।  

अपहरण
देश में विकास का
शुभ लक्षण।

जो भी सोचेगा       
इंसानियत पर       
नहीं बचेगा।       

चलो खरीदें             
कोई सस्ता-सा कल       
महंगाई में।

बच्चे करते    
दूरदर्शनासन            
चौबीसों घंटे।

हुए अमीर         
गरीबी पर लिख
क्या तकदीर।

मार ही डाला            
इन आलोचकों ने         
नये कवि को।

मां और बाप
सुन टीनएज़र
हो चुपचाप।


शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

पीकर जाम / करे देशवासी माँ / तुझे सलाम


पाँच साल पहले के लिखे कुछ हाइकु यहाँ बाँट रहा हूँ। कैसा लगा बताइएगा। 

तुम चाहते
प्रेमचंद बनना,
ले भूखे मर !

पीकर जाम
करे देशवासी माँ
तुझे सलाम ।

देखकर के
उनका अभिनय
है मुझे भय ।

दिन में माला
रात हाथ में भाला
ले डाका डाला ।

तुलसीदास
अदालत में जाओ
रत्ना ने कहा ।

द्वापर में था
पार्थ भ्रमित, अब
कृष्ण का भ्रम ।

आज के कृष्ण
सुदामा का महल
झोंपड़ी बना ।

कोई पांचाली
फिर रच डालेगी
महाभारत ।

विष्णु पुराण
पुरानी परंपरा
विष्णु की स्तुति ।

इंडिया कहो
तब पहचानेंगे
ये इंडियन ।