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| पिछले अंक में हिंदी के विकास में अर्थव्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया गया था। आज अपने दूसरे और अंतिम अंक में सरकार द्वारा हिंदी के प्रचारप्रसार में किये जा रहे प्रयासों की चर्चा कर रहे हैं ! अरुण सी राय |
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में जाने की बजाय सरकार द्वारा किये गए प्रयासों के फलस्वरूप हिंदी की प्रगति में कैसे सुधार हो रहा है, पर ए़क विचार आवश्यक है। सरकार और सरकारी उपक्रमों का दायरा कम नहीं है और राजभाषा कार्यान्वयन के द्वारा काफी काम किया जा रहा है। आम आदमी को जोड़ने और आम जन तक पहुँचने के लिए सरकार की मशीनरी से सशक्त माध्यम कोई अन्य नहीं। ऐसे में यदि सरकार की ओर से प्रयास किया जा रहा है तो उसका अपेक्षित परिणाम अवश्य मिलेगा। इन सबके पीछे जो मुहिम सरकार द्वारा राजभाषा कार्यान्वयन के जरिये हो रही है, उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में राजभाषा विभाग, ना केवल मंत्रालय के स्तर पर बल्कि उद्योग जगत में भी हिंदी के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करता है और नयी नीतियां बना कर उसे आम जनता की भाषा में पहुँचाने के लिए बाध्य करता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जो कि भूतल एवं परिवहन मंत्रालय के अधीन ए़क स्वायत्त प्राधिकरण है, द्वारा देश भर के राजमार्गो पर जानकारी हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में दी जा रही है, जो कि निश्चित रूप से ए़क दूरगामी कदम है और हिंदी के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। ऐसे कई प्रयास हैं जो सरकार के स्तर पर चलाये जा रहे हैं और इनके परिणाम हमारे सामने हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक ऐसा नहीं था। इसी तरह, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा देश के सभी पर्यटन स्थलों पर आम आदमी के लिए उपयोगी सामग्री हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा मेंउपलब्ध है, जबकि कुछ वर्ष पूर्व तक यह सामग्री, जानकारी केवल अंग्रेजी में उपलब्ध हुआ करती थी। यह दो कारणों से हो रहा है। ए़क तो आर्थिक विकास केकारण आम आदमी की पर्यटन में रूचि और दूसरे सरकारी स्तर पर राजभाषा कार्यान्वन के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता ।
सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रश्न पूछने और उत्तर हिंदी में भी मांगे जाने की सुविधा के कारण आम आदमी को काफी सहूलियत हो रही है और आम आदमी हिंदी के और करीब महसूस कर रहा है। भारतीय रेल द्वारा भी हिंदी देश के कोने कोने तक पहुँच रही है और देश को ए़क सूत्र में बाँध रही है। रेलगाड़ियों के नाम इसके सबसे बड़े उदहारण हैं। यही है भाषा की शक्ति, यही है भाषा का उद्देश्य।
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मंगलवार, 14 सितंबर 2010
हिंदी और अर्थव्यवस्था-2
मंगलवार, 7 सितंबर 2010
हिंदी और अर्थव्यवस्था
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हिंदी और अर्थव्यवस्था-2
राजभाषा कार्यान्वयन के लिए संसदीय राजभाषा समिति गठित है। इसकी कई उपसमितियां हैं जो सरकारी क्षेत्र एवं सार्वजनिक उपक्रमों में हिंदी के उपयोग में प्रगामी प्रगति का मूल्यांकन करती हैं। ए़क उपसमिति के राजभाषा संबधी निरीक्षण में मैं भी उपस्थित था। निरीक्षण हिन्दुस्तान पेट्रोलियमका था जिनका वार्षिक विज्ञापन बजट करीब १००० करोड़ रूपये का है। संसदीय समिति ने पाया कि वे अंग्रेजी में विज्ञापन पर लगभग ८५% बजट का उपयोग करते थे। समिति ने उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में बराबर बराबर खर्च करने का निर्देश दिया और कंपनी द्वारा इसका अनुपालन भी किया गया है। संसदीय राजभाषा समिति वर्ष भर में लगभग १०० कार्यालयों का निरिक्षण करती है जिससे स्वतः स्पष्ट है कि सरकार हिंदी की प्रगति के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
संक्षेप में कहें तो हिंदी अब निरीह नहीं। जैसे जैसे शासन आम आदमी तक पहुँच रहा है, हिंदी भी सशक्त हो रही है। हिंदी दिवस के मौके पर देशवासियों से ना केवल हिंदी अपनाने का निवेदन करता हूँ बल्कि यह निवेदन करता हूँ कि कम से कम ए़क भारतीय भाषा जरुर सीखें और अपने बच्चों को भी प्रेरित करें. इस से सही मायने में देश की सांस्कृतिक विविधता से परिचय होगा और अंतर्देशीय अविश्वास के माहौल में भी सुधार होगा.