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| हे कृष्ण - आओ तुम एक बार लेकर कल्की अवतार!
पापियों को मुक्ति दी आज पापों के बोझ से अवनि है धंस रही फ़ैल रहा दसों दिशाओं में अपरिमित भ्रष्टाचार हे कृष्ण - तुम आओ एक बार !
था स्वयं को अर्पित किया आज यहाँ हर चौराहे पर स्त्रीत्व खंडित हो रहा संवेदनाएं प्रस्तर हुयीं हुआ असीमित व्याभिचार हे कृष्ण - आओ तुम एक बार !
श्राप गांधारी का लिया आज धरती पर है अधर्म का दिया जला धर्मांध बने हुए सब कर रहे एक दूजे पर प्रहार हे कृष्ण - आओ तुम एक बार ! ले कर कल्की अवतार!! |
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर राजभाषा हिन्दी परिवार की तरफ़ से आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई! |
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गुरुवार, 2 सितंबर 2010
हे कृष्ण …!
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