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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

हिन्दी.blogspot.com या हिन्दी.tk लिखिए जनाब न कि hindi.blogspot.com या hindi.tk


हाल ही में अनिल.blogspot.com से गुजरा। अचंभित था कि ब्लॉग का नाम तो हिन्दी में दिखता है, लेकिन ब्लॉग का पता जिसे यू आर एल कहते है, वह हिन्दी में, अपनी लिपि नागरी में! फिर वहाँ अपनी प्रतिक्रिया में भी यह पूछ बैठा कि यह कैसे होगा? अगले दिन अपने फुरसतिया जी फेसबुक पर फुरसत में मिल गये। उनसे पूछा और बस धीरे-धीरे काम हो गया। अब आप भी देख लीजिए कि कैसे होता है ये सब! उम्मीद है कि बहुत कम लोग जानते होंगे। तो क्यों न हिन्दी ब्लॉगों के आधे पते, जिनपर हमारा बस चलता है (क्योंकि ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम तो रहेगा ही। मालिक हम नहीं, ब्लॉगर है, गूगल है), उनको अपनी भाषा हिन्दी के साथ-साथ अपनी लिपि नागरी में कर दिया जाय। लेकिन लफड़ा यह है कि ब्लॉग तो बन चुका है। फिर तरीका तो एक ही है कि नया ब्लॉग बनाया जाय। कौन-सा पैसा लगता है! और फिर उस ब्लॉग के साथ अपने वर्तमान ब्लॉग को ऐसे बाँध दिया जाय कि नये ब्लॉग पते पर जाते ही वर्तमान ब्लॉग खुल जाय। इसे तकनीकी भाषा में रिडायरेक्ट करना कहते हैं। चलिए, यही सब यहाँ देखते-करते हैं।
     आपके पास अपना ब्लॉग है ही। आपको सबसे पहले एकया ब्लॉग बनाना होगा जिसके पते में आप नागरी लिपि का इस्तेमाल चाहते हैं। जैसे एक ब्लॉग जिसका यू आर एल ( पता या वेब एड्रेस ) हो - हिन्दी.blogspot.com , यह हमें बनाना है। सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि ब्लॉगस्पॉट पर हिन्दी नाम से हम ब्लॉग बना पाएंगे या नहीं? आप पहले भी ब्लॉग बनाते समय इस प्रक्रिया से गुजर चुके हैं। ब्लॉगर ब्लॉग बनाते वक्त हमसे हमारा अभीष्ट या मनोवांछित ब्लॉग पता ( या यू आर एल) पूछता है, फिर उसकी उपलब्धता जाँचकर बताता है कि हमारे द्वारा दिया गया पता हमें मिल सकता है या नहीं? फिलहाल हमें नागरी लिपि में पता चाहिए, इसलिए हमें यह जान लेना चाहिए कि वास्तव में हमारा पता दिखेगा हिन्दी.blogspot.com की तरह लेकिन यह बाह्य दृश्य होगा, न कि मूल रूप से ऐसा होगा। 
     सबसे पहले आपको यहाँ जाना है। यहाँ जानेपर आप यूनिकोड से पनीकोड में किसी वेब पते का या शब्द का परिवर्तित रूप देख सकते हैं। आप जिस पते को प्राप्त करना चाहते हैं, उसको हिन्दी में यानी नागरी लिपि में लिख कर नीचे नार्मल टेक्स्ट टू पनीकोड बटन दबायें। अब आपको अगले बॉक्स में xn-- से शुरू होने वाला एक कोड मिलेगा। नीचे चित्र में देखें।



यहाँ सिर्फ हिन्दी लिखकर भी पनीकोड में बदला जा सकता था। आप देख रहे हैं कि हिन्दी की जगह j2bd4cyah0f मिला। xn-- सबमें मिलेगा। यानी हिन्दी का पनीकोड रूप j2bd4cyah0f मिला। बस हो गया आधा काम। अब आप अपने ब्लॉगर के डैशबोर्ड में जाकर नया ब्लॉग बनाने का विकल्प चुनें। नया ब्लॉग बनाने की प्रक्रिया से आप परिचित होंगे ही। नये ब्लॉग के लिए जब ब्लॉगर आपसे ब्लॉग पता माँगे, तब आप पनीकोड वाले शब्द को रखे। ध्यान रहे यहाँ पनीकोड को लिखते समय में xn-- छूट न जाय। पनीकोड बहुत महत्वपूर्ण है। चित्र में आप देख सकते हैं।




इस तरह आप नया ब्लॉग तो बना चुके। अब आप ब्राउजर में पता हिन्दी.blogspot.com भरेंगे और आपका ब्लॉग खुल जाएगा।
अब अगर आप पहले से ब्लॉग के स्वामी हैं, तो आप भला क्यों सारे लेखों को इस नये ब्लॉग पर डालना चाहेंगे? वैसे यह भी आसान है और ब्लॉगर इसकी सुविधा देता है। लेकिन हम यहाँ यह चाहते है कि नये पते को ब्राउजर में भरते ही आपका वर्तमान ब्लॉग खुल जाय, तब? अब देखिए कि यह कैसे किया जा सकता है।
आप पहले अपने डैशबोर्ड में जाकर नये ब्लॉग के (जैसे यहाँ हिन्दी.blogspot.com) डिज़ाइन में जाकर HTML मे संपादित करें चुनें। फिर <b:include data='blog' name='all-head-content'/> को खोजिए। कंट्रोल के साथ एफ दबाकर भी खोज सकते हैं। यह अंश मिल जाने पर ठीक इसके बाद <meta content='0;url=http://hindibhojpuri.blogspot.com' http-equiv='refresh'/> चिपका देना है। यहाँ url= के बाद आप उस ब्लॉग का पता भरें जिससे हिन्दी.blogspot.com पर जाते ही वह ब्लॉग खुल सके। जैसे यहाँ तिरछे अक्षरो में मेरे ब्लॉग का पता url= के बाद रखा गया है, वैसे आप भी कर सकते हैं।
चित्र में देखिए।


डॉट टीके से

अगर आपके ब्लॉग का नाम बड़ा है और आप चाहते हैं कि यह छोटा हो सके ताकि दूसरों को बताते समय, उन्हें छोटा नाम याद रखना पड़े, तो डॉट टीके की सहायता ली जा सकती है। यानी आप ब्लॉग के पता में अब सिर्फ .tk लिखकर काम चला सकते हैं। इस तरह अब हिन्दी.blogspot.com की जगह सिर्फ हिन्दी.tk से काम चला सकते हैं। डॉट टीके पर पता पाने के लिए आपको पनीकोड में बदले बिना अपने ब्लॉग का पता सीधे नागरी-यूनिकोड में भरना होता है। आप जैसे ही डॉट टीके खोलेंगे, आपके सामने यह होगाः



आप यहाँ सीधे इच्छित डोमेन नाम भरें, फिर गो बटन दबाएँ। उपलब्धता के आधार पर आपको आगे बढना होगा। यह बहुत आसान है। जैसे मैंने हिंदी भरा (यहाँ आपको पनीकोड में बदलने की जरूरत नहीं है) ताकि हिंदी.tk नाम मुझे मिल सके। यह नाम उपलब्ध था। फिर अगले चरण में आप उस ब्लॉग या साइट पते को भर सकते हैं, जिसे आप अपने .tk डोमेन पर जाते ही खोलना चाहते हैं। नीचे चित्र देखें-




फारवर्ड दिस डोमेन टू चुनते हुए यूज योर न्यू डोमेन के बॉक्स में उस ब्लॉग का पता भरें, जिसे आप अपने .tk डोमेन पर जाते ही खोलना चाहते हैं। जैसे मैंने अपने ब्लॉग का पता भर दिया। रजिस्ट्रेशन लेंथ में 12 महीने चुन लें। अभी जैसी कि मेरी जानकारी है, मुफ्त में नवीकरण या रिन्यूअल कराते हुए हम इस समय अवधि को फिर से विस्तार दे सकते है।
.tk के नियम-कानून आप यहाँ पढ सकते हैं। फिलहाल इतना ही ध्यान देना है कि सिर्फ तीन डॉट टीके नाम आप इस्तेमाल कर सकते हैं। (हम कितने शरीफ़ हैं, आप जानते ही है) याद रहे कि मुफ़्त सेवा में कोई गारंटी नहीं होती। बस यही नियम हैं। एक और नियम कि आपकी उम्र 18 साल से ज्यादा हो, यह कोई बात हुई?
हाँ, तो हो गया काम। अब जब कोई हिंदी.tk खोलेगा तब, मेरा ब्लॉग खुल जायेगा। ज्यादा माथापच्ची नहीं करके आजमाइए इसे।

एक और लाभ है अपनी लिपि मे ब्लॉग पता रखने का
       
    हिन्दी या हिंदी का लफड़ा स्वाभाविक है। क्योंकि हमारे लिए भले ही यह एक ही शब्द है लेकिन मशीन के लिए ये दो अलग-अलग शब्द हैं। इस अनुस्वार की समस्या से बचने के लिए मैंने हिन्दी और हिंदी दोनों नामों से ब्लॉस्पॉट और टीके, दोनो जगह सारी सेटिंग एक ही रख दी ताकि दोनों में से किसी एक के लिखने पर ब्लॉग खुले। लेकिन इस अनुस्वार को छोड़ दें तो अपनी लिपि में पता रखने के बड़े फायदे हैं। मान लीजिए अंग्रेजी में एक ब्लॉग हैं kamal या bharadwaj, अब पढनेवाला इसे क्या पढे? कमल या कमाल या कामल, भरद्वाज या भारद्वाज या भारद्वज या भाराद्वाज या भारदवज या भरदवज? हिन्दी या संस्कृत में भरद्वाज और भारद्वाज दो अलग शब्द हैं और इनके अर्थ भी अलग हैं। एक पिता है और दूसरा पुत्र। यह रोमन लिपि के कारण स्पष्ट नहीं हो सकता। इसका समाधान है नागरी लिपि। तो अपनी लिपि का फायदा उठाने में पीछे क्यों रहें, जबकि यह शुद्धता और स्पष्टता की ओर ले जाती है।

परदे के पीछे

वास्तव में हिन्दी.blogspot.com ब्लॉग का पता होगा यह http://xn--j2bd4cyah0f.blogspot.com लेकिन यह अब मशीन की जिम्मेदारी है कि वह हिन्दी.blogspot.com को http://xn--j2bd4cyah0f.blogspot.com में बदलकर तब खोले। पनीकोड का सारा खेल नये ब्राउजरों में होता है जैसे मोज़िला, गूगल क्रोम आदि में। इंटरनेट एक्सप्लोरर के नये संस्करणों में भी होना चाहिए। इंटरनेट एक्सप्लोरर के बारे में नहीं कह सकता क्योंकि इसपर मैंने देखा नहीं। सम्भवतः इंटरनेट एक्सप्लोरर 7 या उसके बाद के संस्करणों में पनीकोड सहायता मौजूद होनी चाहिए।

पनीकोड क्या है, इस लफड़े में पड़ने की जरूरत नहीं। बस अपनी लिपि में ब्लॉग पता बन गया, बात खतम!
तो क्यों नहीं आज से सब अपने ब्लॉग का पता अपनी लिपि में कर दें। आपका क्या खयाल है? इसे अधिक से अधिक ब्लॉगरों तक पहुँचाइये। एक आन्दोलन बना दें इसको... 


12:14 / 23 दिसम्बर 2011- 


रिडायरेक्ट करते वक्त <b:include data='blog' name='all-head-content'/> खोजने में जिन्हें परेशानी या मुश्किल मालूम पड़ती हो, वे 15वीं पँक्ति में देखें (डिजाइन के एचटीएमएल संपादित / एडिट वाले विकल्प में)  <b:include data='blog' name='all-head-content'/> अंश मिलेगा। बस इसके बाद <title><data:blog.pageTitle/></title> मिलेगा। आपको इन दोनों के बीच  <meta content='0;url=http://hindibhojpuri.blogspot.com' http-equiv='refresh'/> वाला अंश रख देना है, जिसमें ब्लॉग का पता होना चाहिये। यानी आपको 15वीं और 16 पँक्ति के बीच <meta content='0;url=http://hindibhojpuri.blogspot.com' http-equiv='refresh'/>, ऐसा अंश  रख देना है। इस तरह  पहले की 16वीं पँक्ति अब 17वीं पँक्ति हो जाएगी।