मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

कहते हैं तारे गाते हैं


हरिवंशराय बच्चन

9. कहते हैं तारे गाते हैं

कहते  हैं,  तारे  गाते हैं!

सन्नाटा वसुधा पर छाया,
नभ में हमने कान लगाया,
फिर भी अगणित कंठों का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं!
कहते  हैं,  तारे  गाते हैं!

स्वर्ग सुना करता यह गाना,
पृथ्वी ने तो बस यह जाना,
अगणित  ओस-कणों में  तारों के नीरव आंसू  आते हैं!
कहते  हैं,  तारे  गाते हैं!

ऊपर देव, तले मानवगण,
नभ में दोनों गयन-रोदन,
राग  सदा  ऊपर को उठता, आंसू  नीचे झर जाते हैं!
कहते  हैं,  तारे  गाते हैं!
***

10 टिप्‍पणियां:

  1. राग सदा ऊपर को उठता, आंसू नीचे झर जाते हैं!
    कहते हैं, तारे गाते हैं!

    कितना सुन्दर गीत... बच्चन जी को नमन.
    सादर आभार.

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  2. बच्चन जी की सुंदर प्रस्तुति ..... आभार

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  3. राग सदा ऊपर को उठता, आंसू नीचे झर जाते हैं!
    shukriya....ek baar fir padhwane ke liye.

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  4. 'मैं छुपाना जानता तो जग मुझे साधु समझता
    शत्रु मेरा बन गया है, छल रहित व्यवहार मेरा'

    बच्चन जी की ये पक्तियां जब भी मन में उतरती हैं तो उनकी छवि बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है । उनकी संवेदना का सही रूप उनकी आत्म कथाओं में देखने को मिलता है । उनकी यह कविता भी अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  5. सामान्य से लगने वाले शब्दों में गहरे भाव समेटे.. बच्चन जी की यह श्रृंखला भी सराहनीय है!!

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  6. बहुत सुंदर कविता,,,बच्चन जी को नमन !

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  7. राग सदा ऊपर को उठता,
    आंसू नीचे झर जाते हैं!...

    सहज कही बात पर कितनी गहरी ...
    हरिवंश जी का रचना संसार अलग ही है ... शुक्रिया इस प्रस्तुति पर ...

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  8. स्वर्ग सुना करता यह गाना,
    पृथ्वी ने तो बस यह जाना,
    अगणित ओस-कणों में तारों के नीरव आंसू आते हैं!
    कहते हैं, तारे गाते हैं!
    वाह आनंद आ गया .

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  9. Thanks very interesting blog!
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