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शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

स्मृति डॉट कॉम यानी हजारों हिन्दी गीत एक जगह सुने नहीं, पढ़ें

कई बार हमें हिन्दी फिल्मों के गाने ठीक से समझ नहीं आते या स्पष्ट सुनाई नहीं पड़ते। जिन लोगों को गाने याद करने हैं, समझने हैं या फिर गाने हैं या जो फिल्मी और गैर-फिल्मी हिन्दी गानों के शौकीन हैं, उनके लिए एक बेहद काम की वेबसाइट है स्मृति डॉट कॉम। इस वेबसाइट पर हम कलाकार, संगीतकार या संगीत निर्देशक, गायक, गीतकार या फिल्म, इनमें से किसी के नाम से या वर्ष के हिसाब से खोजकर हिन्दी गानों को रोमन या नागरी में पढ सकते हैं। जहाँ तक मुझे लगता है, इस वेबसाइट पर कम-से-कम 25-30 हजार गाने होंगे।



वेबसाइट के पहले पन्ने पर आप गीत खोजने के लिए मौजूद सारे विकल्प चुन सकते हैं। जैसे यहाँ मोहम्मद रफ़ी का गाया मशहूर गीत जिन्हें नाज है हिन्द पर वो कहाँ हैं? को पूरा पढने के लिए, साइट के पहले पन्ने पर सिंगर में एम चुना गया है। फिर आपके सामने यानी एम अक्षर से शुरू होने वाले सभी गायकों के नाम आ जाते हैं। इस बार मोहम्मद रफ़ी चुनने पर अगले पन्ने पर रफ़ी साहब के गाए बहुत से गानों के नाम दिखते हैं। अभी यह साइट अंग्रेजी इंटरफ़ेस में ही दिखती है। रफ़ी साहब के एक हजार से अधिक गानों में से जे अक्षर के पास हम जिन्हें नाज़ हैं… गाना चुनते हैं।


 अब हमारे सामने तीन विकल्प हैं। पहला है रोमन का, दूसरा है यूनिकोड का और तीसरा है जी आई एफ चित्र का। आप आवश्यकतानुसार इनमें से कोई भी चुन सकते हैं। यूनिकोड के लिए  हिंदी  पर क्लिक करें। चित्र रूप में रखने के लिए 
    पर क्लिक करें। चित्र रूप का सीधा सा अर्थ है कि आप आसानी से गीत के शब्दों को संपादित नहीं कर सकते।


गीत के साथ ही किसी भी गाने से सम्बन्धित और सूचनाएँ भी सामने आ जाती हैं, जैसे फिल्म, संगीत निर्देशक, गीतकार, फिल्म के मुख्य कलाकारों आदि का नाम, फिल्म के आने का साल।


यहाँ जिन्हें नाज़ है हिन्द पर… का यूनिकोड पाठ हमारे सामने है।



ये कूचे, ये... हं ऽऽऽ , घर दिलकशी के

ये कूचे, ये नीलाम घर दिलकशी के
ये लुटते हुए कारवां ज़िंदगी के
कहाँ हैं, कहाँ हैं मुहाफ़िज़ खुदी के
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं
कहाँ हैं, कहाँ हैं, कहाँ हैं


ये पुरपेंच गलियां, ये बदनाम बाज़ार
ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झनकार
ये इसमत के सौदे, ये सौदों पे तकरार
जिन्हे नाज़ ...


ये सदियों से बेखौफ़ सहमी सी गलियां
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियां
ये बिकती हुई खोखली रंगरलियाँ
जिन्हे नाज़ ...


वो उजले दरीचों में पायल की छन छन
थकी हारी सांसों पे तबले की धन धन ()
ये बेरूह कमरों मे खांसी कि ठन ठन
जिन्हे नाज़ ...


ये फूलों के गजरे, ये पीकों के छींटे
ये बेबाक नज़रे, ये गुस्ताख फ़िक़रे
ये ढलके बदन और ये बीमार चेहरे
जिन्हे नाज़ ...


यहाँ पीर भी चुके हैं, जवां भी
तन--मन्द बेटे भी, अब्बा मियाँ भी
ये बीवी है () और बहन है, माँ है
जिन्हे नाज़ ...


मदद चाहती है ये हवा की बेटी
यशोदा की हम्जिन्स राधा की बेटी ()
पयम्बर की उम्मत ज़ुलेखा की बेटी,
जिन्हे नाज़ ...


ज़रा इस मुल्क के रहबरों को बुलाओ
ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर उनको लाओ
जिन्हे नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं
कहाँ हैं, कहाँ हैं, कहाँ हैं


अब आप ही सोचिए, कितनी मेहनत से ये काम किया गया है?