वेबसाइट के पहले पन्ने पर आप गीत खोजने के लिए मौजूद सारे विकल्प चुन सकते हैं। जैसे यहाँ मोहम्मद रफ़ी का गाया मशहूर गीत ‘जिन्हें नाज है हिन्द पर वो कहाँ हैं?’ को पूरा पढने के लिए, साइट के पहले पन्ने पर ‘सिंगर’ में ‘एम’ चुना गया है। फिर आपके सामने ‘म’ यानी ‘एम’ अक्षर से शुरू होने वाले सभी गायकों के नाम आ जाते हैं। इस बार ‘मोहम्मद रफ़ी’ चुनने पर अगले पन्ने पर रफ़ी साहब के गाए बहुत से गानों के नाम दिखते हैं। अभी यह साइट अंग्रेजी इंटरफ़ेस में ही दिखती है। रफ़ी साहब के एक हजार से अधिक गानों में से ‘जे’ अक्षर के पास हम ‘जिन्हें नाज़ हैं…’ गाना चुनते हैं।
ये कूचे, ये... हं ऽऽऽ , घर दिलकशी के
ये कूचे, ये नीलाम घर दिलकशी के
ये लुटते हुए कारवां ज़िंदगी के
कहाँ हैं, कहाँ हैं मुहाफ़िज़ खुदी के
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं
कहाँ हैं, कहाँ हैं, कहाँ हैं
ये पुरपेंच गलियां, ये बदनाम बाज़ार
ये गुमनाम राही, ये सिक्कों की झनकार
ये इसमत के सौदे, ये सौदों पे तकरार
जिन्हे नाज़ ...
ये सदियों से बेखौफ़ सहमी सी गलियां
ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियां
ये बिकती हुई खोखली रंगरलियाँ
जिन्हे नाज़ ...
वो उजले दरीचों में पायल की छन छन
थकी हारी सांसों पे तबले की धन धन (२)
ये बेरूह कमरों मे खांसी कि ठन ठन
जिन्हे नाज़ ...
ये फूलों के गजरे, ये पीकों के छींटे
ये बेबाक नज़रे, ये गुस्ताख फ़िक़रे
ये ढलके बदन और ये बीमार चेहरे
जिन्हे नाज़ ...
तन-ओ-मन्द बेटे भी, अब्बा मियाँ भी
ये बीवी है (२) और बहन है, माँ है
जिन्हे नाज़ ...
यशोदा की हम्जिन्स राधा की बेटी (२)
पयम्बर की उम्मत ज़ुलेखा की बेटी,
जिन्हे नाज़ ...
ज़रा इस मुल्क के रहबरों को बुलाओ
ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ
जिन्हें नाज़ है हिन्द पर उनको लाओ
जिन्हे नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं
कहाँ हैं, कहाँ हैं, कहाँ हैं