मंगलवार, 8 जून 2010

लव यू डैड

लव यू डैड


एक व्‍यक्ति अपनी नई नवेली कार को पॉलिश कर रहा था। उसके साथ ही उसका 04 वर्षीय लड़का खेल रहा था  , अचानक उस लड़के ने एक पत्‍थर उठाया और कार पर कुछ खरोच दिया । यह देखते ही उसका पिता उपने पर काबू न रख सका और बिना कुछ सोचे समझे उसने गुस्‍से में बच्‍चे के हाथ को कई बार हिंसक ढंग से मरोड दिया । अस्‍पताल में यह ज्ञात हुआ कि मल्‍टीपल फ्रैक्‍चर के कारण बच्‍चे की सभी उँगलियॉं स्‍थायी रूप बेकार हो गई।

जब बच्‍चे ने अपने पिता को देखा तो उसने ऑंसू भरे ऑखों से कहा ‘’पिताजी कब मेरी उँगलियॉं फिर से ठीक होंगी ?’’ यह सुनते ही पिता निरूत्‍तर हो गया उसे तीव्र ग्‍लानी हुई। वह बहुत दुखी हुआ घर के पिछवाड़े खड़ी कार को लात मारने लगा। अपने ही कृत्‍य से शर्मिंदा व हताश होकर वह कार के आगे बैठ गया । अनायास ही उसकी नज़र बेटे द्वारा खरोचे गए हिस्‍से पर गढ़ गई, बच्‍चे ने उस पर लिखा था ‘'LOVE YOU DAD'’

अगले ही दिन उस व्‍यक्ति ने आत्‍महत्‍या कर ली।

क्रोध एवं प्रेम की कोई सीमा नहीं होती, सदैव खुश्‍नुमा जिन्‍दगी के लिए प्रेम को चुने ................. । वस्‍तु का उपयोग तथा मनुष्‍यों से प्रेम करना चाहिए पर दुर्भाग्‍यवश आज की दुनिया में मुनुष्‍यों का उपयोग तथा वस्‍तु से प्‍यार किया जा रहा है। 

आइए इस वर्ष हम यह स्‍मरण करें कि वस्‍तु का उपयोग तथा मनुष्‍यों से प्रेम करना चाहिए। आप स्‍वयं क्‍यों न हों...........? अपने विचारों का मनन करें, ऐसा करने से ऐसी भावना आपके वचन एवं कर्म अर्थात कृत्‍य बनेंगे । आपके कृत्‍य आपके आदतें बनेगी और आपकी आदतों से ही आपका चरित्र .......... आपका चरित्र अंतत: आपका भाग्‍य बनेगा। 


मैं अभिभूत हूँ कि मेरे मित्र ने मुझे यह स्‍मरण करवाया।

 [श्री अभय निम्‍बालकर द्वारा प्रेषित ई-मेल का अनुवाद ] 

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