सोमवार, 10 दिसंबर 2012

मधुशाला .... भाग --10 / हरिवंश राय बच्चन



जन्म -- 27 नवंबर 1907 
निधन -- 18 जनवरी 2003 

मधुशाला ..... भाग ---10

कर ले, कर ले कंजूसी तू मुझको देने में हाला,
दे ले, दे ले तू मुझको बस यह टूटा फूटा प्याला,
मैं तो सब्र इसी पर करता, तू पीछे पछताएगी,
जब न रहूँगा मैं, तब मेरी याद करेगी मधुशाला।।७१।

ध्यान मान का, अपमानों का छोड़ दिया जब पी हाला,
गौरव भूला, आया कर में जब से मिट्टी का प्याला,
साकी की अंदाज़ भरी झिड़की में क्या अपमान धरा,
दुनिया भर की ठोकर खाकर पाई मैंने मधुशाला।।७२।

क्षीण, क्षुद्र, क्षणभंगुर, दुर्बल मानव मिट्टी का प्याला,
भरी हुई है जिसके अंदर कटु-मधु जीवन की हाला,
मृत्यु बनी है निर्दय साकी अपने शत-शत कर फैला,
काल प्रबल है पीनेवाला, संसृति है यह मधुशाला।।७३।

प्याले सा गढ़ हमें किसी ने भर दी जीवन की हाला,
नशा न भाया, ढाला हमने ले लेकर मधु का प्याला,
जब जीवन का दर्द उभरता उसे दबाते प्याले से,
जगती के पहले साकी से जूझ रही है मधुशाला।।७४।

अपने अंगूरों से तन में हमने भर ली है हाला,
क्या कहते हो, शेख, नरक में हमें तपाएगी ज्वाला,
तब तो मदिरा खूब खिंचेगी और पिएगा भी कोई,
हमें नरक की ज्वाला में भी दीख पड़ेगी मधुशाला।।७५।

यम आएगा लेने जब, तब खूब चलूँगा पी हाला,
पीड़ा, संकट, कष्ट नरक के क्या समझेगा मतवाला,
क्रूर, कठोर, कुटिल, कुविचारी, अन्यायी यमराजों के
डंडों की जब मार पड़ेगी, आड़ करेगी मधुशाला।।७६।

यदि इन अधरों से दो बातें प्रेम भरी करती हाला,
यदि इन खाली हाथों का जी पल भर बहलाता प्याला,
हानि बता, जग, तेरी क्या है, व्यर्थ मुझे बदनाम न कर,
मेरे टूटे दिल का है बस एक खिलौना मधुशाला।।७७।

याद न आए दुखमय जीवन इससे पी लेता हाला,
जग चिंताओं से रहने को मुक्त, उठा लेता प्याला,
शौक, साध के और स्वाद के हेतु पिया जग करता है,
पर मै वह रोगी हूँ जिसकी एक दवा है मधुशाला।।७८।

गिरती जाती है दिन प्रतिदन प्रणयिनि प्राणों की हाला
भग्न हुआ जाता दिन प्रतिदन सुभगे मेरा तन प्याला,
रूठ रहा है मुझसे, रूपसी, दिन दिन यौवन का साकी
सूख रही है दिन दिन सुन्दरी, मेरी जीवन मधुशाला।।७९।

यम आयेगा साकी बनकर साथ लिए काली हाला,
पी न होश में फिर आएगा सुरा-विसुध यह मतवाला,
यह अंतिम  बेहोशी, अंतिम साकी, अंतिम प्याला है,
पथिक, प्यार से पीना इसको फिर न मिलेगी मधुशाला।८०।
क्रमश: 

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (11-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. n jane dukh me, avsad me, santaap me kitna dukh ko harti hai ye madhushaalaa.
    peene wala hi jane pikar ye madhushala.....

    sarthak prastuti.

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  3. जीवन मृत्यु का यह शाश्वत चित्रण और कहाँ मिलेगा .यह फलसफा देती है तेरी मधुशाला .


    क्षीण, क्षुद्र, क्षणभंगुर, दुर्बल मानव मिट्टी का प्याला,
    भरी हुई है जिसके अंदर कटु-मधु जीवन की हाला,
    मृत्यु बनी है निर्दय साकी अपने शत-शत कर फैला,
    काल प्रबल है पीनेवाला, संसृति है यह मधुशाला।।७३।


    यम आयेगा साकी बनकर साथ लिए काली हाला,
    पी न होश में फिर आएगा सुरा-विसुध यह मतवाला,
    यह अंतिम बेहोशी, अंतिम साकी, अंतिम प्याला है,
    पथिक, प्यार से पीना इसको फिर न मिलेगी मधुशाला।८०।
    क्रमश:

    मधुशाला .... भाग --10 / हरिवंश राय बच्चन

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  4. यदि इन अधरों से दो बातें प्रेम भरी करती हाला,
    यदि इन खाली हाथों का जी पल भर बहलाता प्याला,
    हानि बता, जग, तेरी क्या है, व्यर्थ मुझे बदनाम न कर,
    मेरे टूटे दिल का है बस एक खिलौना मधुशाला।

    बच्चन जी की यह कृति बार- बार मन को बहला जाती है। इसे पोस्ट करने के लिए धन्यवाद।

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  5. यम आयेगा साकी बनकर साथ लिए काली हाला,
    वाह! वाह! वाह!

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