मंगलवार, 3 जनवरी 2012

हिंदी की वर्तनी का स्थिरीकरण


हिंदी की वर्तनी का स्थिरीकरण

बदलते समय के साथ यह महसूस किया जाने लगा है कि हिंदी की वर्तनी को सुधारा जाए, इसका स्थिरीकरण किया जाए और इसे एकरूप बनया जाए। क्षेत्रीय भेद या व्यक्तिगत भेद के कारण हिंदी के प्रयोग में हम प्रायः अनेकरूपता पाते हैं। कई विकल्पों के कारण हिंदी-वर्तनी दुविधाजनक और बोझिल बन जाती है। यदि हम इसे सुदृढ़ बनाना चाहते हैं, तो हमें इन वैकल्पिक रूपों में से एक को मान्यता देनी चाहिए।
नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं, इस पर आपके सुझाव और विचारों का स्वागत है।
                                                                                                            मनोज कुमार

य को न लिखा जाए
त्याज्य
ग्राह्‌य
रुपये
रुपए
किराये
किराए
अनुयायी
अनुयाई
जग-हँसायी
जग-हँसाई
नये
नए
नयी
नई
उत्तरदायी
उत्तरदाई
स्थायी
स्थाई
गये
गए
जायेगी
जाएगी
लीजिये
लीजिए
चाहिये
चाहिए
सोयी
सोई
दिखायी
दिखाई
के लिये
के लिए
अनुस्वार का विकल्प होने पर अनुस्वार का प्रयोग
अकाङ्‌क्षा
आकांक्षा
चञ्चल
चंचल
दण्ड
दंड
हिन्दी
हिंदी
सम्बन्ध
संबंध
अहम्‌
अहं
परसर्गीय शब्दों और उनके विभाज्य को अलग लिखा जाए
आपका
आप का
आप सबका
आप सब का
मुझहीको
मुझ ही को
इसतकके लिए
इस तक के लिए
जानेसे भी
जाने से भी
रो-रोकर
रो-रो कर
गांधीजी
गांधी जी
काम करवाके
काम करवा के
एकाकी व्यंजन का प्रयोग किया जाए
मूर्च्छा
मूर्छा
कर्त्तव्य
कर्तव्य
अद्‌र्ध
अर्ध
तत्त्व
तत्व
महत्त्व
महत्व
पूरा व्यंजन लिखा जाए
अँग्रेज़ी
अँगरेज़ी
अक्सर
अकसर
इँग्लिश
इँगलिश
गर्दन
गरदन
फैक्ट्री
फैक्टरी
पार्टी
पारटी
बर्तन
बरतन
बर्दाश्त
बरदाश्त
उल्टा
उलटा
बिल्कुल
बिलकुल
व्यंजन को हलंत न किया जाए
पृथक्‌
पृथक
सम्यक्‌
सम्यक
अर्थात्‌
अर्थात
पश्चात्‌
पश्चात
महान्‌
महान
विद्वान्‌
विद्वान
संयुक्त वर्ण को संयोगी वर्णों में तोड़ कर लिखा जाए
पद्म
पद्‌म
बाह्य
बाह्‌य
सिद्धि
सिद्‌धि
छुट्टियाँ
छुट्‌टियाँ
समास चिन्ह से जोड़ कर लिखा जाए
कहाँ कहाँ
कहाँ-कहाँ
तुम सा
तुम-सा
देख रेख
देख-रेख
भू तत्व
भू-तत्व
लड़ना झगड़ना
लड़ना-झगड़ना
सीता राम
सीता-राम
कम से कम
कम-से-कम
सटा कर लिखा जाए
आत्म हत्या
आत्महत्या
प्रति शत
प्रतिशत
मानव मात्र
मानवमात्र
यथा समय
यथासमय
राज कुमार
राजकुमार
भेदकरी चिन्हों का प्रयोग किया जाए
हॉल – महाकक्ष
हाल – दशा, अवस्था
ख़ाना – घर (डाकघर), कोष्‌ठक (चारख़ाना)
खाना – भोजन करना
ग़ौर – विचार
गौर – गोरा
ज़माना – समय, काल, वक़्त
जमाना – दही जमाना, काम अच्छी तरह से होना
फ़न – हुनर
फन – साँप का

11 टिप्‍पणियां:

  1. आपके ब्लाग से बहुत ही उपयोगी जानकारी मिलती है।
    शुभकामनाएं।
    नव वर्ष मंगलमय हो।

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  2. मनोज जी ,


    हिंदी के वर्तनी का इतनी सूक्ष्मता से प्रस्तुति एक बहुत ही उपयोगी karya hai क्योंकि यह तो मैं दावे से कह सकती हूँ ऐसी त्रुटियाँ मीडिया में बहुत होती रहती हें और हम ब्लोगर भी इस तरह की गलतियाँ करते ही रहते हें. अगर हिंदी में लिखें तो उसकी शुद्धता से परिचित होना ही चाहिए.

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  3. itni acchhi jaankari itni sookshmata se di ki mujhe lag raha hai jaise kisi kaksha me baith gayi hun. vyanjan vale bhaag se main bilkul anbhigy hi thi.aaj gyan prapti hui. aage se apne lekhan me in sab ka dhyan rakhne ki koshish karungi.

    is amooly jankari k liye bahut aabhari hun.

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  4. ज्ञानवर्धक पोस्ट । धन्यवाद ।

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  5. हिंदी में वर्तनी में एक रूपता आनी चाहिए .. लेकिन सारा बदलाव करना कठिन काम है . जिस तरह से हमने पढ़ा है उसी कि आदत रहती है और वही सही लगता है लेकिन असंभव कुछ नहीं .. वर्तनी को सुदृढ़ बनाने के लिए आप के द्वारा दिए सुझाव बहुत उपयोगी हैं ... आभार

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  6. मनोज जी!!!आपका लेख बहुत उपयोगी है। यूनिकोड में टाइप करते समय विशेष कर इंडिक आईएमई में बहुत से शब्दों को हलंत के साथ टाइप करना कठिन है। जैसे आप बाह्य को चाहते हुए भी हलंत के साथ नहीं लिख पाए। इसी तरह के बहुत से शब्द हैं जो यूनिकोड में हलंत के साथ लिखना कठिन है। उद्घाटन-उद्-घाटन को ही लें। किसी शब्द का अंतिम अक्षर यदि य है तो उसके लिए ए का प्रयोग उचित है। भारत सरकार ने इस नियम को छोड़ कर रुपए की जगह रुपये लिखना शुरु किया था,जो मेरी दृष्टि में गलत है। पंचमाक्षर नियम का पालन सर्वथा उचित है। एकाकी व्यंजन का प्रयोग मेरी दृष्टि में गलत है क्योंकि वैसा करने से उस शब्द के उच्चारण में भेद पड़ जाता है; तत्व कभी भी तत्त्व का उच्चारण नहीं कर सकता, इसी प्रकार अच्छाई और अछाई, पत्थर और पथर, वांच्छित और वांछित में यह भेद स्पष्ट है। संयुक्त वर्णों को तोड़ कर लिखना तो सही है पर बहुत बार टाइप करते हुए हलंत के साथ लिखना कठिन होता है जैसे आपने पद्म को पद्-म लिखना चाहा लेकिन द हलंत के साथ नहीं लिखा जा सका।

    मैं राजभाषा पर वर्तनी और हिंदी के मानकीकरण पर एक शृंखला लिखने की योजना बना चुका हूं। जल्दी ही अवसर मिला तो मैं इसे राजभाषा पर शुरु करना चाहूंगा।

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  7. @ मनोज भारती जी,
    शुभस्य शीघ्रम्‌!!

    हलंत के साथ दिख तो रहा है, शायद छोटा फॉंट के कारण स्पष्ट न हो।

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  8. इस पर त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी जा सकती। समय लगेगा।

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  9. अमूल्य जानकारी के लिए धन्यवाद् ,शिरोरेखा को लेकर मेरी कुछ शंकाएं है ,यदि समाधान हो जाये तो बड़ी कृपा होगी -भ तथा ध पर शिरोरेखा नहीं होती, उसी प्रकार क्या उन सभी वर्णों पर शिरोरेखा नहीं होती जिनपर curve होता है यथा श , क्ष आदि ,पूर्ण शिरोरेखा के लिए क्या कोई नियम है ?यदि मेरी इस दुविधा का निराकरण हो जाये तो मैं बहुत आभारी रहूंगी .

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  10. खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग
    है, स्वरों में कोमल निशाद और बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं, पंचम
    इसमें वर्जित है, पर
    हमने इसमें अंत में पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता है.
    ..

    हमारी फिल्म का संगीत वेद नायेर ने दिया है.
    .. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में चिड़ियों
    कि चहचाहट से मिलती है...
    my webpage - हिंदी

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