बुधवार, 21 मार्च 2012

दोहावली .... भाग - 4 / संत कबीर



जन्म  --- 1398
निधन ---  1518
दुर्बल को न सताइए, जाकि मोटी हाय ।
बिना जीव की हाय से, लोहा भस्म हो जाय ॥ 31 ॥
दान दिए धन ना घते, नदी ने घटे नीर ।
अपनी आँखों देख लो, यों क्या कहे कबीर ॥ 32 ॥
दस द्वारे का पिंजरा, तामे पंछी का कौन ।
रहे को अचरज है, गए अचम्भा कौन ॥ 33 ॥
ऐसी वाणी बोलिए , मन का आपा खोय ।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय ॥ 34 ॥
हीरा वहाँ न खोलिये, जहाँ कुंजड़ों की हाट ।
बांधो चुप की पोटरी, लागहु अपनी बाट ॥ 35 ॥
कुटिल वचन सबसे बुरा, जारि कर तन हार ।
साधु वचन जल रूप, बरसे अमृत धार ॥ 36 ॥
जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय ।
यह आपा तो ड़ाल दे, दया करे सब कोय ॥ 37 ॥
मैं रोऊँ जब जगत को, मोको रोवे न होय ।
मोको रोबे सोचना, जो शब्द बोय की होय ॥ 38 ॥
सोवा साधु जगाइए, करे नाम का जाप ।
यह तीनों सोते भले, साकित सिंह और साँप ॥ 39 ॥
अवगुन कहूँ शराब का, आपा अहमक साथ ।
मानुष से पशुआ करे दाय, गाँठ से खात ॥ 40 ॥

क्रमश:
दोहवाली --- भाग –1 / भाग – 2 /भाग - 3

11 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति ।

    नवसंवत्सर की शुभकामनायें ।।

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  2. दुर्बल को न सताइए, जाकि मोटी हाय ।
    बिना जीव की हाय से, लोहा भस्म हो जाय ॥ 31 ॥
    bahut achche nd anmol vachan padhwane ke liye dhanyavad sangeeta jee .

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  3. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
    इंडिया दर्पण की ओर से शुभकामनाएँ।

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  4. बहुत बढ़िया दोहे...सुन्दर संकलन!

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  5. बहुत बढ़िया दोहे...सुन्दर संकलन!

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  6. बहुत सुन्दर दोहे …………प्रेरणास्पद्।

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति| नवसंवत्सर २०६९ की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  8. हीरा वहाँ न खोलिये, जहाँ कुंजड़ों की हाट ।
    बांधो चुप की पोटरी, लागहु अपनी बाट ॥
    गज़ब की बात.

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  9. सादर आभार।
    नवसंवत्सर की अनंत शुभकामनायें।

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  10. दस द्वारे का पिंजरा, तामे पंछी का कौन ।
    रहे को अचरज है, गए अचम्भा कौन ॥
    एक से एक ज्ञान की बातें!

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  11. कबीर के अनमोल दोहे ,बहुत सुंदर ....,

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