शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

इन्दिरा प्रियदर्शिनी गांधी :: संगीता स्वरूप जी की कविता।

रेखा श्रीवास्तव जी की पोस्ट निर्धारित थी, उसे कल शनिवार को प्रस्तुत करेंगे।  

आज भारत की तीसरी प्रधान मंत्री श्रीमती इन्दिरा प्रियदर्शिनी गांधी (१९ नवंबर १९१७-३१ अक्तूबर १९८४) का जन्म दिन है। १९६६ से १९७७ तक लगातार तीन कार्यकाल के लिए और १९८० से सन् १९८४ में उनकी हत्या तक वो भारत की प्रधानमंत्री थीं। वे कुल पंद्रह साल तक इस पद पर रही एवम् अब तक भारत की प्रधानमंत्री होने वाली एकमात्र महिला हैं।

राजभाषा हिंदी के प्रति अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा था,

“देश की भाषाओं के बीच हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में कार्य करना है। इसे इसलिए मान्यता नहीं मिली है कि यह सबसे अधिक विकसित भाषा है वरन्‌ इसलिए कि इसे अहिंदी भाषी लोगों ने अंगीकार किया है”।

विश्वभाषा के रूप में भी उन्होंने हिंदी को देखा और कहा,

“हम सब की एक समान इच्छा है कि हिंदी सम्पूर्ण विश्व में मित्रता की पताका फहराकर सह अस्तित्व, शांति और अहिंसा का संदेश विश्व के हर हिस्से में फैला दे”।

 

हिंदी बनाम अंग्रेज़ी के सवाल पर उनका कहना था,

“किसी एक प्रदेश के अंग्रेज़ी हठ के कारण समस्त देश में हिंदी की प्रगति को रोका नहीं जा सकता”।

 

 

आज उनको याद करते हुए हम विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और साथ ही प्रस्तुत करते हैं संगीता स्वरूप जी की कविता।

 

Indirag.jpg

इन्दिरा प्रियदर्शिनी गांधी

संगीता स्वरूप

प्रियदर्शनी तुम प्रियदर्शी  

थीं राष्ट्र के प्रति समर्पित

अग्रणी बने हिंद विश्व में

रहीं सदा इस  पर गर्वित

समित सार्क सम्मलेन कर

तुमने क्या क्या कर डाला

हरित क्रांति का शंख बजाकर

देश का रूप बदल डाला .

जिधर तुम निकल जातीं थीं

जनता पीछे चल पड़ती थी

एक झलक पाने को तुम्हारी

आँखें उनकी व्याकुल रहती थीं .

जाति- पांति से दूर सदा ही

बहाई समता की निर्मल धारा

शोषित वर्ग का हो उत्थान

दिया ‘गरीबी हटाओ’ का नारा .

संकट आया देश पर जब भी

निज कौशल से दिया सहारा

मातृभूमि पर आंच न आई

हर मुसीबत से इसे उबारा.

नदियों पर बांधों का बंधन

रेत में नहरों का स्पंदन

हरे भरे खेतों का वर्धन

भारत के माथे पर चन्दन .

मंदिर –मस्जिद-गुरुद्वारे जाकर

माथा टेका हर चौखट पर

माना सब धर्म है एक समान

यही था राष्ट्रीय एकता का गान .

तुमने अखंड देश बनाने को

तन खंड - खंड कर डाला

ख़ूनी प्यास बुझाने को

अपना लहू बहा डाला .

रहे देश में सदा एकता

कर डाला जीवन बलिदान

पर हाय ! भाग्यहीन भारतवासी

क्या दे पाय कुछ प्रतिदान ?

घर-घर , आँगन द्वार- द्वार

मार - काट मची हुई है

ये हिंदू है और ये है मुस्लिम

यही चेतना जगी हुई है .

धर्म के नाम पर जबतक

हम कौमों को बांटेंगे

भाई की गर्दन  कबतक

अपने हाथों ही काटेंगे .

कौम एक है हम सबकी

हर भारतीय को समझना होगा

तभी राष्ट्रीय एकता का स्वप्न

हम सबके लिए सफल होगा.

30 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेरक गीत।
    भारत की लौह महिला इन्दिरा प्रियदर्शनी को सादर नमन।

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  2. बहुत अच्छा और प्रेरक पोस्ट। इंदिरा जी को नमन।

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  3. कौम एक है हम सबकी
    हर भारतीय समझना होगा
    तभी राष्ट्रीय एकता का स्वप्न
    हम सबके लिए सफल होगा

    स्व. इंदिरा गांधी को समर्पित एक सुंदर कविता -सुमन।
    उनकी जयंती पर उन्हें नमन।

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  4. सचमुच इन्दिरा गांधी ,विश्व की सर्वाधिक प्रभावशाली महिलाओँ में से एक थीं.
    नमन .

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  5. बेहद प्रभावशाली और प्रेरक रचना……………सराहनीय प्रस्तुति।इंदिरा जी को नमन।

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  6. इंदिरा जी के जन्म दिवस पर उनको नमन.
    उनके विषय में लिखी गयी कविता वास्तव में उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है. उनके कथनों को प्रस्तुत करके आपने वो बातें याद दिलायीं हैं जो हम सब के जेहन से उतरने लगींथी.

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  7. संगीता स्वरूप जी श्री मति इंदिरा गाँधी जी पर आपके विचार प्रभावशाली लगे|

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  8. प्रभावशाली रचना, इंदिरा प्रियदर्शी को नमन .

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  9. धर्म के नाम पर जबतक

    हम कौमों को बांटेंगे

    भाई की गर्दन कबतक

    अपने हाथों ही काटेंगे

    सच ही दुर्भाग्यशाली है भारत जिसने इतनी योग्य पुत्री को खो दिया.
    बहुत प्रेरक और प्रभावशाली रचना. इंदिरा प्रियदर्शी को शत शत नमन.

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  10. .

    सार्थक रचना । इंदिरा प्रियदर्शिनी जी को नमन !

    .

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  11. aadarniy sir
    aaj ham sabhi srimati indira gandhi ji ko man hi man dhero naman ke saath
    unke dwara kiye gaye atulniy karyo ke prati bhi apna hardik samman prastut
    karte hai.
    saath hi saathsangeeta jiki itni achhi rachna ke liye unko bhi hardik badhai.
    poonam

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  12. देश की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के बलिदान को शत-शत नमन ।
    आपकी कविता अत्यंत प्रेरणादायक है । कविता की निम्न चार पंक्तियां काफी प्रभावित करती है -

    तुमने अखंड देश बनाने को
    तन खंड - खंड कर डाला
    ख़ूनी प्यास बुझाने को
    अपना लहू बहा डाला .

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  13. भारत की पूर्व प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी के जन्म दिवस के अवसर पर हिंदी के प्रति उनके मूल्यवान उदगार साथ में आपकी बेहतरीन कविता एक यादगार पोस्ट बनकर सामने आई. राजभाषा हिंदी की उत्तरोत्तर प्रगति में इस ब्लॉग का योगदान अविस्मर्णीय कहा जायेगा.

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  14. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों का चयन कर भावमय करती रचना के लिये आभार .... ।

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  15. इन्दिरा जी हुबहू तस्‍वीर उतार रख दी संगीता जी ने। संगीता जी और आपको हार्दिक बधाईयां।

    ---------
    वह खूबसूरत चुड़ैल।
    क्‍या आप सच्‍चे देशभक्‍त हैं?

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  16. जब तक जिंदा हूं कम से कम इंदिराजी को तो नहीं भूल पाऊंगा
    उम्दा लिखा है आपने

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  17. बहुत मेहनत से लिखी प्रेरक रचना है...इंदिरा गाँधी जी हमेशा हर स्त्री की प्रेरणा स्त्रोत बनी रहेंगी..

    सुन्दर सशक्त रचना.

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  18. बहुत शानदार और प्रभावशाली रचना ! इंदिरा जी ने विश्व में अपनी प्रतिभा और प्रखरता का पूरी तरह से सिक्का जमाया था और भारत के गौरव को बुलंदियों तक पहुँचाया था ! आज उनके जन्म दिन पर उनको शत शत नमन ! खूबसूरत प्रस्तुति के लिये आपको बधाई !

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  19. बहुत प्रभावशाली अभिव्यक्ति ............आज फिर हमारे देश को ऐसे प्रभावशाली और राष्ट्र समर्पित नेतृत्व की बहुत अधिक आवश्यकता है .
    इंदिरा जी को नमन..!

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  20. सभी पाठकों का आभार ...आप सबकी प्रतिक्रिया ने मेरा मनोबल बढ़ाया ..

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  21. अच्छा लगा पढ़ के, बहुत सी यादें बचपन की सामने आ गयीं. आज भी इंदिरा गाँधी का विकल्प नहीं मिला.

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  22. प्रेरणादायक बेहतरीन प्रस्तुति

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  23. अखंड देश बनाने को
    तन खंड - खंड कर डाला.

    संगीता जी, धन्यवाद जो आपने इंदिरा जी पर इतनी सार्थक रचना पढ़ने के लिए लिंक दिया.बड़ी ही सशक्त रचना है.
    रहे देश में सदा एकता
    कर डाला जीवन बलिदान
    पर हाय ! भाग्यहीन भारतवासी
    क्या दे पाय कुछ प्रतिदान ?
    ये पंक्तियाँ हर भारतवासी को बहुत कुछ सोचने के लिये मजबूर करती हैं.
    कल आपने हमारे बेटे को अपना आशीष प्रदान किया,हम आभारी हैं.

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  24. मंगलवार 19/11/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी एक नज़र देखें

    धन्यवाद .... आभार ....

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