सोमवार, 1 अगस्त 2011

जीवन फ़ूल और नारी का ..

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जब - जब नारी की तुलना
फूलों से की जाती है
तब - तब ये छवि
मन में उभर आती है।
कि सच ही - नारी
फूलों की तरह कोमल है
फूलों की तरह मुस्कुराती है
लोगों में हर दिन
जीने का उत्साह जगाती है
एक मुस्कराहट से
सबके जीवन में
नया उत्साह ले आती है।

पर जब फूलों की तुलना
नारी से की जाती है
तब फूल के मन में
ये बात आती है
हम फूल मुस्कुराते हैं
हर सुबह
जीने का उत्साह जगाते हैं
पर हम नारी की तरह
कहाँ हो पाते हैं।
नारी तो अगले दिन फिर
जीने का उत्साह जगाती है
हम तो एक ही दिन में
निढाल हो मुरझा कर
टहनी से टूट बिखर जाते हैं.

संगीता स्वरुप

मैं कल रात नहीं रोया था --- हरिवंशराय बच्चन



  जन्म – 27 नवंबर   1907
  निधन – 18 जनवरी 2003
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मैं कल रात नहीं रोया था
दुख सब जीवन के विस्मृत कर,
तेरे वक्षस्थल पर सिर धर,
तेरी गोदी में चिड़िया के बच्चे-सा छिपकर सोया था!
मैं कल रात नहीं रोया था!

प्यार-भरे उपवन में घूमा,
फल खाए, फूलों को चूमा,
कल दुर्दिन का भार न अपने पंखो पर मैंने ढोया था!
मैं कल रात नहीं रोया था!

आँसू के दाने बरसाकर
किन आँखो ने तेरे उर पर
ऐसे सपनों के मधुवन का मधुमय बीज, बता, बोया था?
मैं कल रात नहीं रोया था!