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गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

स्वागत बसंत

स्वागत बसंत

-- करण समस्तीपुरी


स्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!
हे प्रेम पुंज ! हे आस रूप !!
ऋतुपति तेरी सुषुमा अनंत !!!
स्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!


कानन की कांति के क्या कहने !
किसलय कली कुसुम बने गहने !
अवनि शुचि पीत सुमन पहने !
मानो विधि की रचना जीवंत !!
स्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!



आम मंजरी की महक से,
और खगकुल की चहक से !
और अलिकुल की भनक से !
गूंजते हैं दिक् दिगंत !
स्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!


मन्मथ की मार बनी असहय !
कोकिल की कूक करुण अतिशय !
सुन विरही उर उपजे संशय !
विरहानल को भड़काने या,
करने आए हो सुखद अंत !
स्वागत ! स्वागत !! स्वागत बसंत !!!