मशीन अनुवाद सिर्फ सीधे सीधे वाक्यों के अतिरिक्त भी होता है. अगर हम किसी भी शासकीय पत्र को लें तो उसके लिखने का तरीका और उसकी शब्दावली अलग होती है. इसमें हर शब्द का एक अलग अर्थ हो सकता है. इसके लिए एक अलग शासकीय शब्दों का भण्डारण करते हैं और जब ऐसे पत्रों का अनुवाद होता है तो उसी को प्रयोग करते हैं. वैसे भी हम दैनिक जीवन में भी शासकीय शब्दावली को अलग प्रयोग में लाते हैं बल्कि सिर्फ शासकीय ही क्यों? मेडिकल , फिजिक्स , केमिस्ट्री सभी विषयों के लिए अलग शब्दावली का प्रयोग होता है.
साधारण में हम " To " का प्रयोग परसर्ग के रूप में करते हैं और इसका अर्थ "को/से" से लेते हैं लेकिन पत्रावली की भाषा में हम इसको "सेवा में" या "प्रति" के रूप में लेते हैं. मशीन अनुवाद में भी अगर हम पत्रों का अनुवाद करते हैं तो इसको ही प्रयोग करते हैं.
इसके साथ ही हम पत्र में यदि संक्षिप्त संकेतों का प्रयोग भी करते हैं तो उसका विस्तृत रूप अनुवाद में प्राप्त होता है.
अंग्रेजी में हम "Ref :" ही लिखते हैं लेकिन अनुवाद करने के लिए मशीन इसको इसके पूर्ण रूप में विस्तृत करके ही अनुवाद देती है. "Ref :" का अनुवाद हमें "सन्दर्भ " ही मिलेगा कुछ और नहीं. सम्पूर्ण पत्र की भाषा को ये शासकीय भाषा में ही अनुवाद करती है.
इससे हमें ये फायदा होता है कि कई स्थानों पर आने वाले पत्रों की भाषा और अंग्रेजी का गहन ज्ञान न रखने वाले लोगों के लिए भी ये सहज हो जाता है कि अन्य विभागों से प्राप्त हुई सामग्री का वे अनुवाद करके ठीक से समझ सकते हैं. यहाँ भी द्विअर्थी शब्दों के लिए वही नियम प्रयोग में लाया जाता है जैसे कि अगर हम शासकीय सामग्री का अनुवाद कर रहे हैं तो उसके लिए शासकीय शब्दकोष को प्रयोग करते हैं ताकि उससे अधिक विकल्प प्राप्त न हों.
जब हम हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद की बात करते हैं तो एक प्रश्न हमसे पूछा जाता है कि क्या हमारी मशीन "गया गया गया" का सही अनुवाद दे सकती है. तो हमारा यही उत्तर होता है कि हाँ वो एकदम सही अनुवाद ही प्रस्तुत करेगी. वाक्य विन्यास के अनुसार ही अनुवाद भी होता है. इसमें प्रथम शब्द कर्ता दूसरा कर्म और तीसरा क्रिया होगा. अतः हमें प्राप्त होने वाला अनुवाद "Gaya went to Gaya " ही होगा. यहाँ हम यह भी बता दें कि अगर कोई शब्द संज्ञा है और उसको हम व्यक्ति , स्थान और क्रिया तीनों रूपों में प्रयोग करते हैं तो भी हमारी मशीन उसको सही ढंग से प्रस्तुत कर देती है.
हाँ इसकी कुछ सीमायें भी हैं क्योंकि मशीन को पढ़ाने में हमने व्याकरण की शुद्धता पर भी ध्यान दिया है. इस लिए अगर हम कोई वाक्य अगर गलती से भी गलत लिख देते हैं तो वह हमें ये निर्देश देती है. " frame the sentence again "
आज कल जो हमारी मीडिया की भाषा हो गयी है या फिर हम जिसे fluent english कहते हैं उसमें व्याकरण की शुद्धता पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है. अगर हम कभी किसी समाचार पत्र का कोई समाचार डालकर अनुवाद चाहते हैं तो हमें इस सीमा का ध्यान रखना होता है और अगर नहीं रखते हैं तो मशीन हमको याद दिला देती है. हर मशीन की अपनी सीमा होती है. चाहे हम उससे भौतिक कार्यों के लिए प्रयोग करें या फिर सॉफ्टवेयर जैसी चीज को प्रयोग करें. सीमा का तो हमें हर स्थान पर ध्यान रखना ही पड़ेगा. उसको हम उसकी कमजोरी नहीं मान सकते हैं बल्कि मनुष्य अधिक त्वरित कार्य करने वाली मशीन भले मनुष्य के वर्षों के प्रयास का फल हो फिर भी वह अगर मानव भूल का शिकार है तो वह उसको शुद्ध करके हमें नहीं दे सकती है. नियमानुसार वह इस बात के लिए इंगित कर सकती है और हमारे वाक्य को फिर से विन्यास कि सलाह दे सकती है. वह मनुष्य से द्रुत गति से काम करके वह मनुष्य के कार्य की गति को बढ़ा ही रही है. मानव भूल जैसी बात के लिए इसमें कोई स्थान नहीं होता है क्योंकि वह जो भी हमने उसको सूचनाएं दे रखी हैं वह उन्हीं को प्रयोग करके हमें प्रदान कर देती है.
मशीन अनुवाद कैसे हमारे लिए दिन पर दिन उपयोगी बनता जा रहा है, इसको हम आगामी अंशों में देख सकेंगे.
हिंदी मशीन अनुवाद लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हिंदी मशीन अनुवाद लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2010
शुक्रवार, 24 सितंबर 2010
मशीन अनुवाद का विस्तार !
पिछली कड़ी में हमारे कुछ मित्रों ने टिप्पणी में ये बात भी कही थी कि हम क्या हमारी अगली ५ पीढ़ी भी मशीन से सही अनुवाद प्राप्त नहीं कर सकती! इसका क्या आधार था, ये तो मैं नहीं समझ पाई, पर जहाँ तक मेरा अपना विचार है - मानव, मेधा और मशीन ये तीनों ही ऐसी चीजें हैं जिन्होंने विज्ञान की दृष्टि से वो प्रगति की है जिसकी कुछ दशकों पूर्व कल्पना नहीं की जा सकती थी.
अगर हम मानव अनुवादक और मशीन अनुवाद की तुलना करें तो हमें उसकी गति , स्तर और क्षेत्र सभी का ध्यान रखना होगा. मानव मष्तिष्क की एक सीमा है और ज्ञान के क्षेत्र में भी हम तभी प्रविष्ट होते है जब हम उससे जुड़े होते हैं. जीवन में बहुत सारे क्षेत्र है और उनके बहुत सारे विशेषज्ञ भी हैं. परन्तु व्यक्ति हर क्षेत्र की जानकारी अपने मष्तिष्क में एक सीमा तक ही संचित कर सकता है और मशीन असीमित. इसके लिए मशीन अनुवाद प्रक्रिया में अलग अलग क्षेत्र निश्चित कर दिए जाते हैं जैसे -- चिकित्सा, विधि, पर्यटन, प्रशासनिक आदि आदि.
हर क्षेत्र में अनुवाद की जरूरत होती है, यह आवश्यक नहीं है कि चिकित्सा क्षेत्र का विशेषज्ञ एक अच्छा अनुवादक सिद्ध हो सके क्योंकि उसको भाषा का उतना अच्छा ज्ञान न हो और यही बात सभी क्षेत्रों में लागू होती है. हम शब्दकोश के कितने शब्दों को प्रयोग करेंगे क्योंकि उसके लिए समय लगता है और तब हमारी अनुवाद की गति प्रभावित होगी और अगर हम नेट पर पड़े शब्दकोश के प्रयोग की बात करें तो उसकी शब्द सीमा अभी बहुत ही सीमित है. मशीन अनुवाद के लिए अलग अलग क्षेत्र निश्चित किये गए हैं. बहुअर्थी शब्दों को सम्बंधित क्षेत्र के शब्दकोश में संचित किया जाता है और जो एक सामान्य शब्दकोश है शेष को उसमें. जिस शब्द का सिर्फ एक ही अर्थ होता है उसको हम सामान्य क्षेत्र में ही रख देते हैं. अगर हम प्रशासनिक सामग्री को मशीन से अनुवादित कर रहे हैं तो आरम्भ में ही संकेत से इंगित किया जाता है कि हमारी सामग्री किस क्षेत्र की है और उसको किस शब्दकोश को प्राथमिकता देनी है अगर वह शब्द वहाँ अनुपस्थित होता है तो उसे सामान्य शब्दकोश से ही ले लिया जाता है और सही अनुवाद प्राप्त किया जा सकता है.
अगर हम आरोप का एक पक्ष देखें तो "गुड मोर्निंग " का अनुवाद हमारी मशीन को तो "अच्छी सुबह " ही देना चाहिए क्योंकि उसको तो नहीं मालूम है कि ये एक अपने आप में एक सम्पूर्ण वाक्य कहा जाता है. लेकिन मशीन मानव निर्देशित नियमों पर काम कर रही है और उसको इस बात का पूरा पूरा निर्देश दिया गया है कि इस तरह के वाक्यों को कैसे अनुवादित करना है और हमें "शुभ प्रभात" ही अनुवाद प्राप्त होगा.
मैं इस विषय में एक बहुत अच्छा उदहारण देती हूँ जैसे -- "old " विशेषण के लिए हम हिंदी में विभिन्न संज्ञा के साथ विभिन्न अर्थों में प्रयोग करते हैं . इसके लिए "old man ", "old friend " और 3 years old " . आम धारणा के अनुसार तो मशीन को पुराना आदमी, पुराना मित्र और ३ साल पुराना ही देना चाहिए जो कि इसका साधारण अर्थ समझा जाता है लेकिन नहीं ये मशीन भी इस के लिए "बूढा आदमी", "पुराना मित्र" और " ३ वर्षीय " ही अनुवादित करेगी. मशीन कैसे अलग अलग अर्थों को अलग अलग संज्ञा के साथ प्रयोग में ला सकती है. इसके लिए उसको विभिन्न प्रकार के निर्देशों के द्वारा सक्षम बनाया जाता है कि उसको किस स्थिति में कौन सा नियम प्रयोग करना है. किस वर्ग के शब्द के साथ कैसे अन्य वर्ग को प्रयोग करना है. सभी कुछ विशेषज्ञों के द्वारा निर्देशित होता है. इसके लिए इतने स्पष्ट निर्देश होते हैं कि मशीन को संज्ञा, सर्वनाम , क्रिया , विशेषण , क्रिया विशेषण सभी के विभिन्न प्रकारों से भी उसको अवगत कराने के लिए सामग्री संचित की जाती है और उसको पहचानने के लिए हमारे विशेषज्ञों ने बहुत बारीकी से उसकी सीमायें तय की हैं ताकि उसको अनुवाद के लिए किसी भी संशय का सामना न करना पड़े और सही अनुवाद के लिए सही शब्द का प्रयोग किया जा सके. अगर हम मानव त्रुटि से किसी गलत संकेत को दे देते हैं तो हमको अवश्य ही गलत शब्द का प्रयोग ही अनुवाद में प्राप्त होगा. मशीन उसको अपने अनुसार सही नहीं कर सकती है.
मशीन अनुवाद जिस पर पूरे देश में विभिन्न संस्थान विभिन्न भाषाओं में कार्य कर रहे हैं और उसमें हम सफलतापूर्वक कार्य कर सकते हैं. हाँ , यह अवश्य है कि इसके विस्तार और परिमार्जन का कार्य असीमित होता है क्योंकि जैसे जैसे हमारे परीक्षण होते हैं वैसे ही हमें ज्ञात होता है कि अमुक शब्द या अमुक वाक्य अभी अनुवादित होने में कुछ समस्या है और फिर उसके निराकरण के लिए कार्य करना होता है ताकि हम किसी भी सीमा में उसको प्रयोग करने के लिए सफल हो सकें. मशीन अनुवाद मात्र अंग्रेजी से हिंदी और हिंदी से अंग्रेजी में ही नहीं हो रहा है अपितु यह अंग्रेजी से मराठी, मलयालम, कन्नड़, तेलुगु, उर्दू, पंजाबी, बंगला सभी भाषाओं में हो रहा है. यह अवश्य है किसी में अभी सक्षमता में कमी है और किसी भाषा में बहुत सक्षमता से कार्य कर रहा है. हिंदी में कार्य करते हुए बहुत वर्ष बीत चुके हैं और इसका सम्पूर्ण ढांचा सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है. इसके लिए विभिन्न भाषाओं के भाषाविद , कंप्यूटर विशेषज्ञ, व्याकरण के ज्ञाता सभी का उल्लेखनीय सहयोग रहा है और आगे भी इनके सहयोग से ही हम इसकी गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं.
शुक्रवार, 10 सितंबर 2010
हिंदी का विस्तार : मशीनी अनुवाद प्रक्रिया !
उरई(जालौन) में जन्मी रेखा श्रीवास्तव जी का लेखन बचपन से ही शुरू हो गया! राजनीतिशस्त्र, समाजशास्त्र और शिक्षाशस्त्र में एम. ए. कंप्यूटर में डिप्लोमा. प्राप्त रेखा जी आई आई टी कानपुर में विगत २३ वर्षों से मशीन अनुवाद में शोध सहायक के पद पर कार्य कर रही हैं।. पिछले दो वर्ष से ब्लॉग्गिंग के क्षेत्र में कदम रखा है। कादम्बिनी, साप्ताहिक हिंदुस्तान, धर्मयुग, नवनीत , सरिता और मनोरमा जैसी स्तरीय पत्रिकाओं में इनकी रचनाएं समय-समय पर प्रकाशित होती रहीं हैं।
हिंदी भले ही विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा न हो लेकिन हिंदी भारत की प्रमुख भाषा है और भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र भाषा भी है. हम अपने देश , प्रदेश, शहर, गाँव और गली मोहल्ले में तो इसी को सुनते हुए पले बढे हैं और इसी लिए इसकी प्रगति , प्रचार एवं प्रसार भी हमें बहुत प्रिय है. हमारे सारे प्रयास इसी के लिए होने भी चाहिए.
और लोगों की तरह हिंदी मुझे भी प्रिय है और तभी इसके सहज और सुलभ प्रयोग के लिए चल रहे एक विशाल अभियान "मशीन अनुवाद" से मैं इसके आई आई टी में आरम्भ होने के प्रथम प्रयास १९८७ से जुड़ी और उस समय से जब कि हमारे समूह के संयुक्त प्रयासों से एक अलग रोमन का निर्माण किया ( जो आज आई आई टी कानपुर रोमन के नाम से जानी जाती है) . इस अभियान को शैश्ववास्था से लेकर आज इसके पूर्ण परिपक्व होने तक के सफर की मैं साक्षी रही हूँ और इससे निरंतर सम्बद्ध हूँ. इसको सिर्फ संगणक विज्ञान ( computer science ) और हिंदी का समागम नहीं मना जा सकता है बल्कि इसके लिए प्रबुद्ध जनों ने पाणिनि की अष्टाध्यायी से लेकर तमाम व्याकरण के उद्गम शास्त्रों का अध्ययन करके इसको सही दिशा प्रदान की है. इसमें कंप्यूटर इंजिनियर , भाषाविज्ञ दोनों की ही महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. सबसे अधिक तो इसमें रूचि रखने वालों की भूमिका होती है.
इसमें मशीन तो वही करती है जो उसको दिशा निर्देश प्राप्त होता है और ये दिशा निर्देश इतने स्पष्ट और पारदर्शी होने चाहिए कि मशीन को शब्द से लिंग, वचन और पुरुष के भेद का स्पष्ट ज्ञान प्राप्त हो सके. इसके मध्य की प्रक्रिया इतनी जटिल और पेचीदी होती है की कई चरणों में कई रूपों में इसको स्पष्ट करना पड़ता है ताकि हम सही अनुवाद प्राप्त कर सकें.
मशीन अनुवाद को सिर्फ अंग्रेजी से हिंदी में ही नहीं अपितु हिंदी से अंग्रेजी के लिए भी तैयार किया गया है. जिससे कि हम एक साहित्य की दिशा में नहीं बल्कि विज्ञान , मेडिकल, वाणिज्य आदि सभी क्षेत्रों की सामग्री को अपनी भाषा में अनुवाद कर सकें और हिंदी को समृद्ध बना सकें. अगर हिंदी जानने वाले अन्य क्षेत्रों की जानकारी प्राप्त कर उसे अपनी भाषा में चाहे तो इसके प्रयोग से ये संभव है. अन्य भारतीय भाषाओं के लिए भी हम इस को प्रयोग कर सकते हैं.
इसके प्रयोग के बढ़ने के साथ साथ ही इसका शब्दकोष (lexicon ) समृद्ध करना होता है क्योंकि सीमायें बढ़ाने से उसके ज्ञान और शब्द कोष भी बढ़ता जाता है. जो शब्द शब्दकोष में नहीं होंगे उनको लिप्यान्तरण के द्वारा दर्शाया जाता है. इसकी आतंरिक प्रक्रिया इतनी विस्तृत है कि उसको समझाना बहुत ही दुष्कर कार्य है. इसके लिए सरकार द्वारा अपेक्षित सहयोग मिला होता तो इसका विकसित स्वरूप कुछ और ही होता.
यद्यपि गूगल भी अपनी अनुवाद प्रणाली को प्रस्तुत कर चुका है और लोग इसका प्रयोग कर रहे हैं लेकिन अगर गुणवत्ता की दृष्टि से देखें तो गूगल हमारी प्रणाली के समक्ष कहीं भी नहीं ठहरता. इसका तुलनात्मक अध्ययन हमने अपने कार्य की महत्ता को दर्शाने के लिए किया है और उसको भविष्य में होने वाले कार्यों के लिए प्रमाण स्वरूप सरकार के समक्ष भी रखा है. अपनी कुछ वैधानिक सीमाओं के चलते इसको प्रकट करना संभव नहीं है. फिर भी बहुत जल्दी अपनी सीमाओं के साथ इसके प्रयोगात्मक स्वरूप को राजभाषा के माध्यम से प्रस्तुत अवश्य करूंगी.
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
