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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

हिन्दी.blogspot.com या हिन्दी.tk लिखिए जनाब न कि hindi.blogspot.com या hindi.tk


हाल ही में अनिल.blogspot.com से गुजरा। अचंभित था कि ब्लॉग का नाम तो हिन्दी में दिखता है, लेकिन ब्लॉग का पता जिसे यू आर एल कहते है, वह हिन्दी में, अपनी लिपि नागरी में! फिर वहाँ अपनी प्रतिक्रिया में भी यह पूछ बैठा कि यह कैसे होगा? अगले दिन अपने फुरसतिया जी फेसबुक पर फुरसत में मिल गये। उनसे पूछा और बस धीरे-धीरे काम हो गया। अब आप भी देख लीजिए कि कैसे होता है ये सब! उम्मीद है कि बहुत कम लोग जानते होंगे। तो क्यों न हिन्दी ब्लॉगों के आधे पते, जिनपर हमारा बस चलता है (क्योंकि ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम तो रहेगा ही। मालिक हम नहीं, ब्लॉगर है, गूगल है), उनको अपनी भाषा हिन्दी के साथ-साथ अपनी लिपि नागरी में कर दिया जाय। लेकिन लफड़ा यह है कि ब्लॉग तो बन चुका है। फिर तरीका तो एक ही है कि नया ब्लॉग बनाया जाय। कौन-सा पैसा लगता है! और फिर उस ब्लॉग के साथ अपने वर्तमान ब्लॉग को ऐसे बाँध दिया जाय कि नये ब्लॉग पते पर जाते ही वर्तमान ब्लॉग खुल जाय। इसे तकनीकी भाषा में ‘रिडायरेक्ट करना’ कहते हैं। चलिए, यही सब यहाँ देखते-करते हैं।
     आपके पास अपना ब्लॉग है ही। आपको सबसे पहले एक नया ब्लॉग बनाना होगा जिसके पते में आप नागरी लिपि का इस्तेमाल चाहते हैं। जैसे एक ब्लॉग जिसका यू आर एल ( पता या वेब एड्रेस ) हो - हिन्दी.blogspot.com , यह हमें बनाना है। सबसे पहले हमें यह जानना होगा कि ब्लॉगस्पॉट पर ‘हिन्दी’ नाम से हम ब्लॉग बना पाएंगे या नहीं? आप पहले भी ब्लॉग बनाते समय इस प्रक्रिया से गुजर चुके हैं। ब्लॉगर ब्लॉग बनाते वक्त हमसे हमारा अभीष्ट या मनोवांछित ब्लॉग पता ( या यू आर एल) पूछता है, फिर उसकी उपलब्धता जाँचकर बताता है कि हमारे द्वारा दिया गया पता हमें मिल सकता है या नहीं? फिलहाल हमें नागरी लिपि में पता चाहिए, इसलिए हमें यह जान लेना चाहिए कि वास्तव में हमारा पता दिखेगा हिन्दी.blogspot.com की तरह लेकिन यह बाह्य दृश्य होगा, न कि मूल रूप से ऐसा होगा। 
     सबसे पहले आपको यहाँ जाना है। यहाँ जानेपर आप यूनिकोड से पनीकोड में किसी वेब पते का या शब्द का परिवर्तित रूप देख सकते हैं। आप जिस पते को प्राप्त करना चाहते हैं, उसको हिन्दी में यानी नागरी लिपि में लिख कर नीचे ‘नार्मल टेक्स्ट टू पनीकोड’ बटन दबायें। अब आपको अगले बॉक्स में xn-- से शुरू होने वाला एक कोड मिलेगा। नीचे चित्र में देखें।



यहाँ सिर्फ ‘हिन्दी’ लिखकर भी पनीकोड में बदला जा सकता था। आप देख रहे हैं कि हिन्दी की जगह j2bd4cyah0f मिला। xn-- सबमें मिलेगा। यानी हिन्दी का पनीकोड रूप j2bd4cyah0f मिला। बस हो गया आधा काम। अब आप अपने ब्लॉगर के डैशबोर्ड में जाकर नया ब्लॉग बनाने का विकल्प चुनें। नया ब्लॉग बनाने की प्रक्रिया से आप परिचित होंगे ही। नये ब्लॉग के लिए जब ब्लॉगर आपसे ब्लॉग पता माँगे, तब आप पनीकोड वाले शब्द को रखे। ध्यान रहे यहाँ पनीकोड को लिखते समय में xn-- छूट न जाय। पनीकोड बहुत महत्वपूर्ण है। चित्र में आप देख सकते हैं।




इस तरह आप नया ब्लॉग तो बना चुके। अब आप ब्राउजर में पता हिन्दी.blogspot.com भरेंगे और आपका ब्लॉग खुल जाएगा।
अब अगर आप पहले से ब्लॉग के स्वामी हैं, तो आप भला क्यों सारे लेखों को इस नये ब्लॉग पर डालना चाहेंगे? वैसे यह भी आसान है और ब्लॉगर इसकी सुविधा देता है। लेकिन हम यहाँ यह चाहते है कि नये पते को ब्राउजर में भरते ही आपका वर्तमान ब्लॉग खुल जाय, तब? अब देखिए कि यह कैसे किया जा सकता है।
आप पहले अपने डैशबोर्ड में जाकर नये ब्लॉग के (जैसे यहाँ हिन्दी.blogspot.com) डिज़ाइन में जाकर HTML मे संपादित करें चुनें। फिर <b:include data='blog' name='all-head-content'/> को खोजिए। कंट्रोल के साथ एफ दबाकर भी खोज सकते हैं। यह अंश मिल जाने पर ठीक इसके बाद <meta content='0;url=http://hindibhojpuri.blogspot.com' http-equiv='refresh'/> चिपका देना है। यहाँ url= के बाद आप उस ब्लॉग का पता भरें जिससे हिन्दी.blogspot.com पर जाते ही वह ब्लॉग खुल सके। जैसे यहाँ तिरछे अक्षरो में मेरे ब्लॉग का पता url= के बाद रखा गया है, वैसे आप भी कर सकते हैं।
चित्र में देखिए।


डॉट टीके से

अगर आपके ब्लॉग का नाम बड़ा है और आप चाहते हैं कि यह छोटा हो सके ताकि दूसरों को बताते समय, उन्हें छोटा नाम याद रखना पड़े, तो डॉट टीके की सहायता ली जा सकती है। यानी आप ब्लॉग के पता में अब सिर्फ .tk लिखकर काम चला सकते हैं। इस तरह अब हिन्दी.blogspot.com की जगह सिर्फ हिन्दी.tk से काम चला सकते हैं। डॉट टीके पर पता पाने के लिए आपको पनीकोड में बदले बिना अपने ब्लॉग का पता सीधे नागरी-यूनिकोड में भरना होता है। आप जैसे ही डॉट टीके खोलेंगे, आपके सामने यह होगाः



आप यहाँ सीधे इच्छित डोमेन नाम भरें, फिर ‘गो’ बटन दबाएँ। उपलब्धता के आधार पर आपको आगे बढना होगा। यह बहुत आसान है। जैसे मैंने हिंदी भरा (यहाँ आपको पनीकोड में बदलने की जरूरत नहीं है) ताकि हिंदी.tk नाम मुझे मिल सके। यह नाम उपलब्ध था। फिर अगले चरण में आप उस ब्लॉग या साइट पते को भर सकते हैं, जिसे आप अपने .tk डोमेन पर जाते ही खोलना चाहते हैं। नीचे चित्र देखें-




‘फारवर्ड दिस डोमेन टू’ चुनते हुए ‘यूज योर न्यू डोमेन’ के बॉक्स में उस ब्लॉग का पता भरें, जिसे आप अपने .tk डोमेन पर जाते ही खोलना चाहते हैं। जैसे मैंने अपने ब्लॉग का पता भर दिया। ‘रजिस्ट्रेशन लेंथ’ में 12 महीने चुन लें। अभी जैसी कि मेरी जानकारी है, मुफ्त में नवीकरण या रिन्यूअल कराते हुए हम इस समय अवधि को फिर से विस्तार दे सकते है।
.tk के नियम-कानून आप यहाँ पढ सकते हैं। फिलहाल इतना ही ध्यान देना है कि सिर्फ तीन डॉट टीके नाम आप इस्तेमाल कर सकते हैं। (हम कितने शरीफ़ हैं, आप जानते ही है) याद रहे कि मुफ़्त सेवा में कोई गारंटी नहीं होती। बस यही नियम हैं। एक और नियम कि आपकी उम्र 18 साल से ज्यादा हो, यह कोई बात हुई?
हाँ, तो हो गया काम। अब जब कोई हिंदी.tk खोलेगा तब, मेरा ब्लॉग खुल जायेगा। ज्यादा माथापच्ची नहीं करके आजमाइए इसे।

एक और लाभ है अपनी लिपि मे ब्लॉग पता रखने का
       
    हिन्दी या हिंदी का लफड़ा स्वाभाविक है। क्योंकि हमारे लिए भले ही यह एक ही शब्द है लेकिन मशीन के लिए ये दो अलग-अलग शब्द हैं। इस अनुस्वार की समस्या से बचने के लिए मैंने हिन्दी और हिंदी दोनों नामों से ब्लॉस्पॉट और टीके, दोनो जगह सारी सेटिंग एक ही रख दी ताकि दोनों में से किसी एक के लिखने पर ब्लॉग खुले। लेकिन इस अनुस्वार को छोड़ दें तो अपनी लिपि में पता रखने के बड़े फायदे हैं। मान लीजिए अंग्रेजी में एक ब्लॉग हैं kamal या bharadwaj, अब पढनेवाला इसे क्या पढे? कमल या कमाल या कामल, भरद्वाज या भारद्वाज या भारद्वज या भाराद्वाज या भारदवज या भरदवज? हिन्दी या संस्कृत में भरद्वाज और भारद्वाज दो अलग शब्द हैं और इनके अर्थ भी अलग हैं। एक पिता है और दूसरा पुत्र। यह रोमन लिपि के कारण स्पष्ट नहीं हो सकता। इसका समाधान है नागरी लिपि। तो अपनी लिपि का फायदा उठाने में पीछे क्यों रहें, जबकि यह शुद्धता और स्पष्टता की ओर ले जाती है।

परदे के पीछे

वास्तव में हिन्दी.blogspot.com ब्लॉग का पता होगा यह http://xn--j2bd4cyah0f.blogspot.com लेकिन यह अब मशीन की जिम्मेदारी है कि वह हिन्दी.blogspot.com को http://xn--j2bd4cyah0f.blogspot.com में बदलकर तब खोले। पनीकोड का सारा खेल नये ब्राउजरों में होता है जैसे मोज़िला, गूगल क्रोम आदि में। इंटरनेट एक्सप्लोरर के नये संस्करणों में भी होना चाहिए। इंटरनेट एक्सप्लोरर के बारे में नहीं कह सकता क्योंकि इसपर मैंने देखा नहीं। सम्भवतः इंटरनेट एक्सप्लोरर 7 या उसके बाद के संस्करणों में पनीकोड सहायता मौजूद होनी चाहिए।

पनीकोड क्या है, इस लफड़े में पड़ने की जरूरत नहीं। बस अपनी लिपि में ब्लॉग पता बन गया, बात खतम!
तो क्यों नहीं आज से सब अपने ब्लॉग का पता अपनी लिपि में कर दें। आपका क्या खयाल है? इसे अधिक से अधिक ब्लॉगरों तक पहुँचाइये। एक आन्दोलन बना दें इसको... 


12:14 / 23 दिसम्बर 2011- 


रिडायरेक्ट करते वक्त <b:include data='blog' name='all-head-content'/> खोजने में जिन्हें परेशानी या मुश्किल मालूम पड़ती हो, वे 15वीं पँक्ति में देखें (डिजाइन के एचटीएमएल संपादित / एडिट वाले विकल्प में)  <b:include data='blog' name='all-head-content'/> अंश मिलेगा। बस इसके बाद <title><data:blog.pageTitle/></title> मिलेगा। आपको इन दोनों के बीच  <meta content='0;url=http://hindibhojpuri.blogspot.com' http-equiv='refresh'/> वाला अंश रख देना है, जिसमें ब्लॉग का पता होना चाहिये। यानी आपको 15वीं और 16 पँक्ति के बीच <meta content='0;url=http://hindibhojpuri.blogspot.com' http-equiv='refresh'/>, ऐसा अंश  रख देना है। इस तरह  पहले की 16वीं पँक्ति अब 17वीं पँक्ति हो जाएगी।





शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

अन्तर्जाल पर किताबों का महासागर…डिजिटल लाइब्रेरी


सोचिए अगर आपको प्रेमचन्द, निराला, महादेवी वर्मा, दिनकर, गाँधी जी सहित राहुल सांकृत्यायन से लेकर वेद-पुराण-रामायण-महाभारत तक सब कुछ मुफ़्त में पढ़ने को मिल जाय या डाउनलोड करने को मिल जाय तो आप कितने भारी वजन से बचे रह सकते हैं! सिर्फ़ साहित्य ही नहीं बल्कि विज्ञान और तकनीक की भी सैकड़ों-हजारों किताबें भी आपको अन्तर्जाल पर मुफ़्त मिल सकती हैं। आप जरूरत होने पर किताबों को इस्तेमाल भी कर सकते हैं, अगर किताब सर्वाधिकार(कापीराइट) मुक्त हुई तब।

अन्तर्जाल पर स्तरीय हिन्दी किताबों की कमी की बात अक्सर कही जाती है, जो बहुत हद तक सही भी है। गूगल पुस्तकों में कई पन्ने गायब रहते हैं या फिर उनको आफलाइन पढ़ना सम्भव बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। हिन्दी समय ने साहित्य की दिशा में तो बहुत काम किया है लेकिन अभी तक कथा-कहानी-उपन्यास के अलावे किताबों पर काम कम ही हुआ है।

भारत सरकार कुछ अच्छे काम भी कर डालती है कई बार। उनमें से एक है किताबों के डिजिटाइजेशन करने का। डिज़िटल लाइब्रेरी पर हिन्दी, अंग्रेजी सहित कई भाषाओं की दो-ढाई लाख से अधिक किताबें मौजूद हैं। आनलाइन पढ़ने के लिए आपको भारत सरकार की वेबसाइट पर जाना होगा।

आइए हम किताबों को खोजने, पढ़ने और उनको डाउनलोड करने का सचित्र विवरण देखते हैं।

सबसे पहले डिजिटल लाइब्रेरी की वेबसाइट पर जाइए।


आप यहाँ विषय और भाषा का चुनाव कर सकते हैं। और फिर किताबों को उनके नाम, लेखक, प्रकाशन का वर्ष आदि के आधार पर दिए गए बक्से की सहायता से खोज सकते हैं। यहाँ एक बात ध्यान देने लायक है किताबों के नाम आप नागरी में लिखकर खोजेंगे तो ठीक से नहीं देख सकेंगे। हालाँकि आप ठीक से समझ नहीं आ रहे शब्दों पर कर्सर ले जाते ही स्थिति पट्टी यानी स्टेटस बार में देख सकते हैं कि उस समझ नहीं आ सकने वाले शब्द का क्या मतलब है। उदाहरण के लिए, मैंने किताब के नाम के लिए टाइटल में ‘हिंदी’ लिखा तब


कुछ ऐसा दिखा। आप देख सकते हैं कि पहले परिणाम पर नीले रंग वाले पाठ समझ नहीं आ रहे। लेकिन उनके ऊपर कर्सर ले जाते ही स्थिति पट्टी में ‘नये हिंदी लघु नाटक’ दिखा।

कई बार किताबों या लेखकों के नाम कुछ अलग तरह से लिखे गये हैं। जैसे राहुल सांकृत्यायन के लिए

S. Rahul
Rahul Sanskrityayna
Rahul Sankritiyayn
rahul sankratayan
rahul sanskrityan

जैसे एकाधिक शब्द लिखे गये हैं। किताबों के नाम भी ऐसे ही लिखे गये हैं। लेकिन इससे घबड़ाने की जरूरत नहीं है। आप थोड़े अन्तर के साथ (चूँकि अंग्रेजी है ही ऐसी भाषा कि वहाँ Rahul, Raahul दोनों लिख सकते हैं) शब्दों को लिखकर अभीष्ट किताब तक पहुँच सकते हैं। जैसे राहुल सांकृत्यायन के लिए सिर्फ़ राहुल एस यानी rahul s लिखकर खोज सकते हैं।


किताबों के नाम के साथ एक बड़ी संख्या दी हुई है, जो उस किताब का बार कोड है। जैसे
Baiswabi Sdi., 5990010115302. Rahul Sanskrityayna. 1943. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 145 pgs.

में 5990010115302 बार कोड है। इसकी जरूरत किताब को डाउनलोड करते समय होगी।
अब आप इस किताब ‘बाईसवीं सदी’ को पढ़ने के लिए नीले रंग में लिखे Baiswabi Sdi. को क्लिक करें। आपके सामने


यह विंडो खुलेगा। आप यहाँ भी बार कोड देख सकते हैं। बुक रीडर एक या दो पर क्लिक करके आप इस किताब को आनलाइन पढ़ सकते हैं। जिस कम्प्यूटर में इंटरनेट डाउनलोड मैनेजर नाम का साफ्टवेयर स्थापित है, कई बार वहाँ किताब पढ़ने में समस्या भी आती है। फिलहाल हम उस असुविधा या समस्या पर नहीं जाकर किताब को डाउनलोड करने की प्रक्रिया पर आते हैं। फिर भी अगर आप किताब आनलाइन पढ़ने में परेशानी महसूस करें तब सम्पर्क कर सकते हैं।

किताबों को कैसे करें डाउनलोड

किसी भी किताब को डाउनलोड करने के लिए डीएलआई डाउनलोडर नाम के साफ्टवेयर की आवश्यकता होगी। उसे आप यहाँ से सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।

डाउनलोड करने के बाद स्थापित करें। पहली बार एक संदेश वाला विंडो खुलेगा। वहाँ आप लाल × (क्रास) पर क्लिक करें। अब आप कोई भी किताब डाउनलोड करने के लिए तैयार हैं।
डीएलआई डाउनलोडर का विंडो नीचे दिखाया गया है, जिसमें आप किसी किताब को खोजने के बाद, उसके बार कोड को दिए बक्से में चिपकाएंगे। पेजेज के अन्दर आप किताब के कितने पन्ने डाउनलोड करना चाहते हैं, यह लिखा जाता है। अगर आप पूरी किताब डाउनलोड करना चाहते हैं, तब उसमें कुछ न लिखें यानी खाली छोड़ दें। अब आपके डाउनलोड बटन पर क्लिक करते ही नीचे स्टेटस में आपको किताब के डाउनलोड होने के लिए उपलब्ध होने का संदेश मिल जाएगा। बगल में दाईं तरफ़ किताब की कुल पृष्ठ संख्या और डाउनलोड हो चुके पन्नों की संख्या भी दिखेगी।



मेरी समझ से इस साफ्टवेयर में आप मोड हमेशा सेफ़ मोड चुनें। फ़ाइल मेन्यू से किताबों को रखने के लिए फोल्डर आदि की सेटिंग अपने सुविधानुसार कर लें। किताब डाउनलोड होने के बाद पीडीएफ में आपको उसी फोल्डर में मिलेगी जिसको आपने फ़ाइल मेन्यू से सेट किया है। डिफाल्ट यानी पहले से यह फोल्डर आपके माई डाक्यूमेंट्स यानी मेरे दस्तावेज के अन्दर डीएलआईडी बुक्स फोल्डर होता है।
किसी भी किताब के डाउनलोड होने के बाद सफलतापूर्वक किताब डाउनलोड होने का एक संदेश मिलेगा।
अब अगर आप चाहते हैं कि किताब के कुछ खास हिस्से ही डाउनलोड हों तब आप डीएलआई डाउनलोडर में पेजेज विकल्प में कुछ अलग ढंग से लिखें। जैसे मुझे बाईसवीं सदी के सिर्फ़ दस पृष्ठ चाहिए तो मैंने लिखा


1-6,9,11-13

यानी आप एक पृष्ठ की पृष्ठ संख्या भी लिख सकते हैं, और अन्तराल भी जैसे 1 से 6 तक के लिए 1-6 या फिर आप अल्पविराम (कोमा या कॉमा) चिन्ह के साथ दोनों भी लिख सकते हैं।



            बस अब किताब का आनन्द बिना आनलाइन हुए भी लीजिए। देखिए किताब की खुद से बनी हुई पीडीएफ और उसका पहला पन्ना:


चलते-चलते यहाँ कुछ किताबों के लिए कड़ियाँ और उनके बार-कोड दिए जा रहे हैं। इसका आनन्द उठाइए।

राहुल सांकृत्यायन

chin mai kya dekha., 99999990001271. rahul sankrtyayan. 1960. hindi. literature. 255 pgs.
Darshan Digdarshan., 5990010118791. Rahul Sankritiyayn. 1944. hindi. Literature. 879 pgs.
divodasha., 99999990012024. sankrityayan, rahul. 1884. hindi. india literature. 159 pgs.
Ghumakkar Shastra., 1990010094258. Rahul Sankrityayan. 1949. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 169 pgs.
rigvedik arya., 99999990275714. sankrityayan, rahul. 1956. hindi. etihasik nibandh. 395 pgs.
roosa me pacheesa varsh [yatra]., 99999990000642. rahul. 1952. hindi. history. 429 pgs.

विश्व की रूपरेखा सम्भवत: अभी दुर्लभ हो रही है। क्योंकि एक विक्रेता के अनुसार इसकी प्रति प्रकाशक के पास भी नहीं मिल रही। तो पढ़िए

Visaw ki Rooprekha., 5990010115569. Rahul Sankrityawan. 1944. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 430 pgs.

1120 Volga Se Ganga 1943., 99999990235425. Rahul. 1943. hindi. Hindi Sahitya. 387 pgs.
1241 KARL MARKS., 99999990235511. Rahul. 0. hindi. Jeevani. 398 pgs.
1337 NAYE BHARAT KE NAYE NETA (1943)., 99999990235592. Rahul. 1943. hindi. Neta. 698 pgs.

Maanav Samaaj., 2990140052599. Sn'krxtyaayan Raahul. 1942. hindi. SOCIAL SCIENCES. 473 pgs.

आदि 40-50 किताबें हैं राहुल जी की।
  
यशपाल

Daadaa kaamred., 5990010043462. Yashpal. 1984. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 194 pgs.
dekha soch or samgha., 99999990276604. yashpal. 1951. hindi. hindi shahitya. 155 pgs.
Desh drohii., 5990010044774. Yashpal. 1984. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 253 pgs.
Dharmayudhya., 1990010094246. Yashpal. 1950. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 127 pgs.
Divyaa., 5990010043549. Yashpal. 1980. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 207 pgs.
Faansi., 1990010086419. Yashpal. . hindi. Literature. 123 pgs.
Jhuuthaa sach., 5990010045093. Yashpal. 1963. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 513 pgs.
Khachchar aur Admee., 5990010042708. Yashpal. 1965. hindi. LITERATURE. 104 pgs.
Lohe kii diivaar ke dono or., 5990010043763. Yashpal. 1953. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 358 pgs.
Manushya ke Roop., 5990010045400. Yashpal. 1983. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 346 pgs.
markswaad., 5990010114399. yashpal. 0. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 227 pgs.
Meri Teri Uski Baat., 5990010045422. Yashpal. 1984. hindi. LANGUAGE. LINGUISTICS. LITERATURE. 631 pgs.

राममनोहर लोहिया

Eminent Parliamentarians Monograph Series.
, 2990100051481. Ram Manohar Lohia. 1990. english. SOCIAL SCIENCES. 120 pgs.
India On China., 6010010076156. Lohia Rammanohar. 1938. english. Political Science. 56 pgs.
Bhaarat Chiin Aur Uttarii Siimaaen'., 2990140081796. Lohiyaa Raamamanohar. 1963. hindi. GEOGRAPHY. BIOGRAPHY. HISTORY. 465 pgs.
hindu banam hindu., 99999990276361. lohiya rammanohar. 1955. hindi. hindu law --digests.. 91 pgs.
itihas chakra., 99999990276362. lohiya rammanohar. 1955. hindi. history-india. 97 pgs.

जवाहर लाल नेहरु

hindustan ki kahani., 99999990000920. nehru, pandit jawaharlal. 1947. hindi. history. 741 pgs.

Bharat ki khoj., 99999990128722. Nehru Jvaherlal. 1996. hindi. General history or asia. 399 pgs.

vishv etihas ki jalak., 99999990276295. nehru motilal. 1931. hindi. hindi sahitya. 495 pgs.
vishva itihas ki jhalak (vol - i)., 99999990000881. pandit jawahr lal nehru. 1937. hindi. history. 775 pgs.
vishva itihas ki jhalak (vol - ii) ., 99999990000880. pandit jawahr lal nehru. 1968. hindi. history. 776 pgs.

प्रेमचन्द और गाँधी जी पर या इनकी लिखी बहुत सी किताबें हैं। इसी तरह शरतचंद्र चट्टोपाध्याय, मन्मथनाथ गुप्त, विनोबा भावे, गुणाकर मुळे, भगतसिंह, मैक्सिम गोर्की, चेखव, दिनकर, रामविलास शर्मा, बंकिम चन्द्र, जयप्रकाश नारायण, मुक्तिबोध, अम्बेदकर, आर एस शर्मा, कार्ल मार्क्स, चतुरसेन, फणीश्वरनाथ रेणु, महादेवी वर्मा, आचार्य शिवपूजन सहाय, डार्विन, विवेकानन्द, भदन्त आनन्द कौशल्यायन, भोलानाथ तिवारी, इन सबकी किताबों का आनन्द लीजिए। साथ ही मनोविज्ञान, इतिहास, कम्प्यूटर, चिकित्साविज्ञान जैसे विषय की भी बहुत सारी किताबें हैं। कभी कभी खोजने में परेशानी हो सकती है। उस वक्त नाम में हिज्जे यानी स्पेलिंग को थोड़ा इधर-उधर कर के देखें।
इस लेख के लिखे जाने तक हिन्दी की 25470, अंग्रेजी की 152326, संस्कृत की 7888 किताबें डिजिटल लाइब्रेरी पर हैं, ऐसी सूचना है। हालाँकि कई किताबें दो-चार बार भी हैं।

ध्यान दें: अभी अभी पता चला है कि कुछ किताबों में डाउनलोड की समस्या है। फिर भी आनलाइन पढ़ने के लिए लगभग सब किताबें  उपलब्ध हैं। किसी-किसी किताब में कोई-कोई पृष्ट भी गायब हो सकता है। लेकिन सामान्यत: सबकुछ ठीक है। ऊपर के कुछ लिंक डाउनलोड के लिए काम नहीं कर पा रहे हैं ।


किताबों के  लिए अन्तर्जाल पर कई विकल्प हैं:

इसके अलावे आप स्क्रीबडी, अपनीहिन्दी, आर्काइव डॉट ओआरजी, हिन्दीसमय (यह भी लाजवाब है। हिन्दी साहित्य के लिए तो समुद्र ही है) आदि जगहों पर भी बहुत कुछ पढ़ सकते हैं। हाँ, स्क्रीबडी से डाउनलोड करने के लिए आपको वहाँ अपना खाता खोलना पड़ेगा। स्क्रीबडी पर भास्कराचार्य की लीलावती और बीजगणित भी हैं।