शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

बालिका का परिचय


सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता-2
बालिका का परिचय
यह  मेरी  गोदी की  शोभा
सुख सुहाग  की  है लाली।
शाही शान भिखारिन की है
मनोकामना    मतवाली ॥
दीप-शिखा है अन्धकार की
घनी  घटा  की उजियाली
ऊषा है यह कमल-भृंग की
है  पतझड़ की  हरियाली॥
सुधा-धार  यह नीरस दिल की
मस्ती   मगन  तपस्वी  की।
जीवन ज्योति नष्ट नयनों की
सच्ची  लगन  मनस्वी  की॥
बीते  हुए  बालपन  की यह
क्रीड़ापूर्ण     वाटिका    है।
वही मचलना, वही किलकना
हँसती    हुई   नाटिका है॥
मेरा मन्दिर, मेरी  मसजिद
काबा-काशी   यह    मेरी
पूजा-पाठ, ध्यान-जप-तप है
घट-घट-वासी   यह  मेरी॥
कृष्णचन्द्र की क्रीड़ाओं को
अपने  आँगन  में  देखो।
कौशल्या के मातृमोद  को
अपने ही मन  में  लेखो॥
प्रभु   ईसा  की  क्षमाशीलता
नबी  मुहम्मद  का विश्वास।
जीव दया जिनवर गौतम की
आओ   देखो  इसके  पास॥
परिचय पूछ रहे  हो मुझसे,
कैसे  परिचय  दूँ  इसका।
वही जान सकता है इसको,
      माता का दिल है जिसका॥

12 टिप्‍पणियां:

  1. subhadraa jee ko paDHa kar hameshaa sukhad saa ehasaas hotaa hai| sunder rachana padhavane ke liye abhara|

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    1. kuch samj mai aya tho muje bhi es ka arth bata do ? madam

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    2. इतनी सुंदर कविता से हमें भी परिचित करवाने के लिए धन्यवाद

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  2. सुभद्रा कुमारी चौहान की इतनी सुन्दर कविता पढवाने के लिए आभार

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  3. यह रचना पढी न थी....सो सबसे पहले तो कोटि कोटि आभार...

    और रचना के भाव तथा शिल्प सौन्दर्य की तो क्या कहूँ....

    सत्य है, एक ममतामय ह्रदय ही इसे सच्चे अर्थों में अनुभूत कर सकता है..

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  4. vaah kitna sach kaha hai.........ye kavita padhwane ke liye aabhar.

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  5. बहुत ही प्यारी सी कविता है....शायद हमारे पाठ्य-पुस्तक में थी...पढवाने का आभार...

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  6. मनोज जी ,सुभद्रा कुमारी चौहान की "महालक्ष्मी बेटी स्वरूपा "पर बेहतरीन मन मुदित करने वाली कविता आपने पढवाई .शुक्रिया .

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  7. बहुत सुन्दर कविता... बचपन में पढ़ी थी... एक बार फिर पढ़कर अच्छा लगा...आपका संकलन समृद्ध हो रहा है... बहुत सुन्दर...

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  8. मातृ-ह़दय की स्नेहिल एवं सुंदरतम संवेदनाओं से सुसज्जित कविता " बालिका का परिचय " वर्णनातीत है। सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद।

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  9. इतनी सुंदर कविता से हमें पर भी परिचित करवाने के लिए धन्यवाद

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