शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

मशीन अनुवाद का विस्तार !

              मशीन अनुवाद के प्रारंभिक स्वरूप के बारे में मैं पहले बता चुकी हूँ. इसके द्वारा हम विस्तृत सोच को जन्म दे चुके हैं. जीवन के हर क्षेत्र में इसकी भूमिका तो वही है लेकिन उसके स्वरूप अलग अलग हो जाते हैं. हम एक सामान्य अनुवाद प्रणाली का प्रयोग करते हैं तो इसको अनुवाद करने वाली एक प्रणाली समझ लेते हैं लेकिन ये प्रणाली को किस स्वरूप में प्रयोग करनाa  आवश्यक होता  है इस ओर भी हम दृष्टि डालेंगे. 
                हम अंग्रेजी के एक शब्द के कई अर्थ लिखते हैं और ये कई अर्थ आवश्यक नहीं है कि हम हर एक का प्रयोग हर स्थान पर कर सकें. हम एक दो शब्दों के साथ ही इस को देख सकते हैं. अगर हम अंग्रेजी के "treatment "  शब्द को लें तो सामान्य स्थिति में इसको हम इसके अर्थ "व्यवहार" को ले सकते हैं और लेते भी हैं , लेकिन अगर इसको हम चिकित्सा क्षेत्र के लिए प्रयोग कर रहे हैं तो हमें अपने अनुवाद में इसके "उपचार या चिकित्सा" अर्थ को लेना होगा. हमारे मशीन को ये नहीं पता है कि हम किस प्रकार के वाक्य का अनुवाद करने जा रहे हैं इस लिए हमें अपनी आवश्यकता के अनुसार क्षेत्र का संकेत भी देना होता है कि वाक्य हमारे किस क्षेत्र से सम्बंधित है . तभी हम सही अनुवाद प्राप्त कर सकते हैं. 

He treated me very well .         उसने मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया.
Doctor treated me very well .  डॉक्टर ने मेरा बहुत अच्छी तरह से इलाज किया.

                  यहाँ पर हमने एक ही क्रिया को एक ही रूप में प्रयोग किया लेकिन वाक्य की ज़रूरत के अनुसार उसके अलग-अलग अर्थ की आवश्यकता होती है और हमारा मशीन अनुवाद इसको इसके क्षेत्र के अनुसार ही अनुवादित करता है. 

यही बात हम संज्ञा के लिए भी देख सकते हैं.  "code"  संज्ञा  है और इसको हम  सामान्य अर्थ में संकेत या कूट के रूप में लेते हैं. इसका प्रयोग भी यही होता है लेकिन अगर इसी शब्द को क़ानून की भाषा में देखेंगे तो इसका अर्थ अलग होता है उस समय हम इसके अर्थ को "संहिता" के रूप में ग्रहण करते हैं. 

इसी तरह से हम  किसी एक शब्द, अंग्रेजी शब्द  को, व्याकरण के कई रूपों में देख लेते हैं. जैसे कि "back "  - ये शब्द अंग्रेजी में भी संज्ञा, क्रिया, विशेषण और क्रिया विशेषण चारों रूप में प्रयुक्त होता है और हिंदी में भी हम इसको एक शब्द होने पर ही विभिन्न स्थानों पर प्रयोग के आधार पर सही रूप में प्रस्तुत  करके ही सही अनुवाद प्रस्तुत कर सकते हैं. 

                   इस कार्य को हम बैंक, चिकित्सा, पर्यटन, क़ानून , कृषि और वाणिज्य सभी क्षेत्रों के लिए सही अर्थों में अनुवाद प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाने का प्रयास कर रहे हैं. सबके क्षेत्रों के अनुसार शब्दावली का चयन और उनका अनुप्रयोग ही हमारे प्रयास को सार्थक सिद्ध करेगा.

19 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक विवेचना करती पोस्ट ...

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  2. ज्ञानवर्धक लेख बहुत सुंदर

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  3. रेखा जी, पहिला बार आपका आलेख से परिचय हुआ है... आभार मनोज जी का... आपका बात आगे बढाते हुए एगो चुटकुला याद आ गया... एक समाचार पत्र में समाचार आया कि Minister inaugurated the steel plant. इसका अनुवाद हिंदी में छपा “मंत्री जी ने इस्पात के पौधों का उद्घाटन किया.”
    मगर इससे भी अजीब घटना तब हुआ जब हम एक बार इलाहाबाद में थे. एगो अखबार में खबर आया, “ उपेंद्र नाथ अश्क़ जी ने परचून की दुकान खोली” .. अंगरेजी अखबार वाला चून सब्द को पकड़कर अनुवाद किया “Great writer Upendra nath Ashk opened a lime shop.” इसी खबर में से लाइम सब्द को पकड़कर दूसरा दिन अखबार वाला लिखा “उपेंद्रनाथ अश्क जी नींबू बेचने लगे.”
    अंत में जब हम खुद उनकेघर गए उनसे मिलने तब पता चला कि परचून सही था. अश्क जी खुदे दोकान पर थे अऊर जब हम उनको बताए त हँसने लगे, बोले हम भी देख रहे हैं तीन दिन से.
    त ई था अनुवाद का महिमा. आपकाजानकारी सचमुच मह्त्वपूर्ण है.

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  4. बहुत बढिया जानकारी उपलब्ध करवाई………आभार्।

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  5. हाँ बिहारी भाई, ये तो हिंदी और अंग्रेजी कि महिमा है. इसी लिए जो काम हम कर रहे हैं न , वह अंतहीन है और लगातार २३ साल से चाल रहा है. उसके स्तर में सुधार और उसका विस्तार ही हमारा उद्देश्य है. इससे अगर अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो ऐसी हमारी आकांशा है. अश्क जी का समाचार उस समयहमने भी पढ़ा था.

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  6. यह मशीन अनुवाद की जानकारी बहुत अच्छी लगी

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  7. प्रेम नारायण अहिरवाल17 सितंबर 2010 को 11:05 am

    हिदी का विकास सतत अन्नत अविरल है

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  8. विज्ञान की चरम उन्‍नति से हिंदी को भी नए आयाम मिले हैं। वर्तमान युग आई. टी. युग है। और सूचना प्रोद्यौगिकी के क्षेत्र में भारत दुनिया भर में अपनी धाक मनवा चुका है। विज्ञान की इस शाखा में पूरा विश्‍व भारतीय मस्तिस्‍क का कायल है।
    आज की तारीख में चिकित्‍सा, अभियंत्रण, पारिस्थितिकी, अर्थशास्‍त्र से लेकर विभिन्‍न भाषाओं से साहित्‍य का हिंदी में अनुवाद करने वालों की भारी मांग है। अनुवाद के संबंध में कहा जाता है कि “कोई भी भाषा अपने आप में इतनी कंजूस होती है कि वो अपना सौन्‍दर्य दूसरी भाषा से बांटना नहीं चाहती।” अतः यह पूर्णतः अनुवादक पर निर्भर करता है कि वह जिस भाषा से और जिस भाषा में अनुवाद कर रहा है उन भाषाओं पर उसका कितना अधिकार है और इन भाषाओं की अनुभूतियों में वह कितनी तारतम्‍यता क़ायम रख सकता है। एक सफल अनुवादक वही होता है जो अनुदित कृति में भी मूल कृति की नैसर्गिक अनुभूतियों को अपरिवर्तित रखे।
    इस दिशा में मशीनी अनुवाद भी काफ़ी कारगर सिद्ध हो सकता है।

    बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    मशीन अनुवाद का विस्तार!, “राजभाषा हिन्दी” पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें

    अंक-9 स्वरोदय विज्ञान, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

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  9. विज्ञान की चरम उन्‍नति से हिंदी को भी नए आयाम मिले हैं। वर्तमान युग आई. टी. युग है। और सूचना प्रोद्यौगिकी के क्षेत्र में भारत दुनिया भर में अपनी धाक मनवा चुका है। विज्ञान की इस शाखा में पूरा विश्‍व भारतीय मस्तिस्‍क का कायल है।
    आज की तारीख में चिकित्‍सा, अभियंत्रण, पारिस्थितिकी, अर्थशास्‍त्र से लेकर विभिन्‍न भाषाओं से साहित्‍य का हिंदी में अनुवाद करने वालों की भारी मांग है। अनुवाद के संबंध में कहा जाता है कि “कोई भी भाषा अपने आप में इतनी कंजूस होती है कि वो अपना सौन्‍दर्य दूसरी भाषा से बांटना नहीं चाहती।” अतः यह पूर्णतः अनुवादक पर निर्भर करता है कि वह जिस भाषा से और जिस भाषा में अनुवाद कर रहा है उन भाषाओं पर उसका कितना अधिकार है और इन भाषाओं की अनुभूतियों में वह कितनी तारतम्‍यता क़ायम रख सकता है। एक सफल अनुवादक वही होता है जो अनुदित कृति में भी मूल कृति की नैसर्गिक अनुभूतियों को अपरिवर्तित रखे।
    इस दिशा में मशीनी अनुवाद भी काफ़ी कारगर सिद्ध हो सकता है।

    बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

    अंक-9 स्वरोदय विज्ञान, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

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  10. रेखा जी अनुवाद के विद्यार्थी होने के नाते आपका यह लेख हमारे लिए काफी लाभदायक है.. अनुवाद ए़क कला जहाँ केवल शबदार्थ से काम नहीं चलता बल्कि सदर्भार्थ भी आवश्यक होता है.. विधि, विज्ञान, तकनीक आदि के लिए विषय पर अधिकार होना आवश्यक होता है...

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  11. एक छोटा सा उदाहरण देखिएःजब हम ब्लॉग पर पोस्ट के लिए कोई तस्वीर अपलोड करते हैं,तो लिखा आता हैःआपकी छवि सहेज दी गई है। आपही बताइए,सहेजी गई चीज़ तस्वीर थी या छवि? क्या दोनों एक ही चीजें हैं? यह बात दिमाग से बिल्कुल निकाल देनी चाहिए कि कम से कम अगली पांच पीढ़ी तक मशीन वह अनुवाद करने में सक्षम होगी जो सामान्य कामकाज के लिए चाहिए।

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  12. हमारीवाणी को और भी अधिक सुविधाजनक और सुचारू बनाने के लिए प्रोग्रामिंग कार्य चल रहा है, जिस कारण आपको कुछ असुविधा हो सकती है। जैसे ही प्रोग्रामिंग कार्य पूरा होगा आपको हमारीवाणी की और से हिंदी और हिंदी ब्लॉगर के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओँ और भारतीय ब्लागर के लिए ढेरों रोचक सुविधाएँ और ब्लॉग्गिंग को प्रोत्साहन के लिए प्रोग्राम नज़र आएँगे। अगर आपको हमारीवाणी.कॉम को प्रयोग करने में असुविधा हो रही हो अथवा आपका कोई सुझाव हो तो आप "हमसे संपर्क करें" पर चटका (click) लगा कर हमसे संपर्क कर सकते हैं।

    टीम हमारीवाणी


    हमारीवाणी पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि

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  13. शिक्षा मित्र जी,

    वैसे तस्वीर और छवि एक ही चीज होती है. एक शब्द के बहुत अर्थ होते हैं और उनका उपयोग सन्दर्भ के अनुसार होता है. आप मशीन अनुवाद से पूर्ण रूप से जब वाकिफ हो जायेंगे तो ये समझ आ जायेगा. ५ पीढ़ी की बात क्यों करते हैं ? हम तो अभी कर रहे हैं. ये शब्दों के विभिन्न सन्दर्भ में लिए गए अर्थों के बारे में मैंने इसी लिए लिखा है. फिर अगर आप कई अर्थों में से भी लेना चाहें तो इसके लिए चुनने का भी विकल्प होता हैकि अनुवाद में एक से अधिक अनुवाद प्राप्त किये जा सकते हैं और जिस वाक्य की संरचना आपको अपने सन्दर्भ के अनुकूल लगे आप उसको चुन सकते हैं.

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  14. अरुण जी,

    हाँ अनुवाद के लिए हमें जिस क्षेत्र को चुनना होता है उसका गहन अध्ययन भी करना पड़ता है और फिर उसमें भी सामान्य शब्द का ही चयन करते हैं ताकि जन सामान्य कोक्लिष्ट न लगे.
    --

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