मंगलवार, 20 जुलाई 2010

ननु शब्दार्थौ काव्यम

ननु शब्दार्थौ काव्यम

काव्य लक्षण

आचार्य भामह ने कहा था “शब्दार्थौ सहितौ काव्यम”। तब से यह विवाद चलता रहा कि काव्य शब्द में है या अर्थ में या दोनों में। इस विवाद कि एक निर्णयात्मक मोड़ दिया आचार्य रुद्रट ने। उन्होंने काव्य का लक्षण करते हुए कहा,

ननु शब्दार्थौ काव्यम”।

अर्थात शब्दार्थ निश्चय ही काव्य है। यह विवाद आगे भी चलता रहा। हेमचन्द्र, विद्यानाथ, वाग्भट्ट, जयदेव, भोज आदि शब्दार्थ के सौंदर्य को काव्य मानते रहे। हां यह स्पष्ट था कि ये सभी भामह और मम्मट के काव्य लक्षण को थोड़े बहुत फेर-बदल के साथ प्रस्तुत करते रहे।

बाद में अग्निपुराणकार ने कहा,

“ध्वनि, वर्ण, पद और वाक्य का ही नाम वाँगमय है जिसके अंतर्गत शास्त्र, इतिहास तथा काव्य का समावेश होता है। किन्तु अमिधा के कारण काव्य शास्त्र और इतिहास से अलग होता है। काव्य लक्षण को उन्होंने पारिभाषित करते हुए कहा,

“जिस वाक्य समूह में अलंकार स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हों तथा जो गुणों से युक्त और दोषों से मुक्त हो उसे काव्य कहते हैं।”

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