रविवार, 20 नवंबर 2011

ऐ वतन याद है किसने तुझे आज़ाद किया?

आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री की कविताएं-4IMG_0596

 

ऐ वतन याद है किसने तुझे आज़ाद किया? 

 

ऐ वतन याद है किसने तुझे आज़ाद किया ?
कैसे आबाद किया ? किस तरह बर्बाद किया ?

कौन फ़रियाद सुनेगा, फलक नहीं अपना,
किस निजामत ने तुझे शाद या नौशाद किया ?

तेरे दम से थी कायनात आशियाना एक,
सब परिंदे थे तेरे, किसने नामुराद किया ?

तू था ख़ुशख़ल्क, बुज़ुर्गी न ख़ुश्क थी तेरी,
सदाबहार, किस औलाद ने अजदाद किया ?

नातवानी न थी फ़ौलाद की शहादत थी,
किस फितूरी ने फ़रेबों को इस्तेदाद किया ?

ग़ालिबन था गुनाहगार वक़्त भी तारीक़,
जिसने ज़न्नत को ज़माने की जायदाद किया ?

माफ़ कर देना ख़ता, ताकि सर उठा के चलूँ,
काहिली ने मेरी शमशेर को शमशाद किया ?

8 टिप्‍पणियां:

  1. सुना है कि आचार्य जी ने संस्कृत और अंग्रेजी में भी गजलें कही हैं…

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  2. बहुत सुन्दर .. आचार्य जी की की रचना में देश की हालत पर रोष है... मनोज जी धन्यवाद ..

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  3. आपके पोस्ट पर आकर अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट शिवपूजन सहाय पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद

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  4. आचार्य जी की प्रस्तुति सोचने पर मजबूर करती है ..

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