बुधवार, 4 अगस्त 2010

कल्पनात्मक आवेग का नाम कविता है। :: काव्य लक्षण-17 (पाश्‍चात्य काव्यशास्त्र-5)

 

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स्व्च्छन्दतावादी कवि-आलोचकों ने सत्य का समर्थन करने वाली परंपरा का खंडन करते हुए आनंद को काव्य का चरम प्रयोजन माना। इस श्रेणी के कवि-आलोचक में से एक थे सैमुअल टेलर कॉलरिज। उन्होंने जैव सिद्धांत को अपनी धारणा में जगह दी। उनके अनुसार कविता की परिभाषा इस प्रकार है, -
“A poem is that species of composition, which is opposed to works of science, by proposing for it’s immediate object pleasure.”

अर्थात्‌ “कविता रचना का वह प्रकार है जो वैज्ञानिक कृतियों से इस अर्थ में भिन्न है कि उसका तात्कालिक प्रयोजन आनंद है, सत्य नहीं। और रचना के सभी प्रकारों से उसका अंतर यह है कि संपूर्ण से वही आनंद प्राप्त होना चाहिए जो उसके प्रत्येक घटक खंड(अवयव) से प्राप्त होने वाली स्पष्ट संतुष्टि के अनुरूप हो।”


कविता की इस परिभाषा में कॉलरिज ने काव्य का मूल प्रयोजन आनंद कहा। सत्य नहीं। उनके अनुसार प्रतिभा और कल्पना अभेद है।

शैली ने भी कविता की परिभाषा देते हुए कहा, -
“समान्यतः कविता को कल्पना की अभिव्यक्ति कहा जा सकता है।”

इसी क्रम में ली हंट भी थे। उन्होंने शैली से एक कदम और आगे बढकर कहा,
”कल्पनात्मक आवेग का नाम कविता है”

इस प्रकार हम देखते हैं कि उस काल में स्वच्छंदतावादी कवि-आलोचकों ने “कल्पना” की महिमा स्थापित की। उन्होंने काव्य को आत्माभिव्यक्ति माना। इसका परिणाम यह हुआ कि इन सभी कवि-आलोचकों ने काव्य में वस्तु-तत्व की अपेक्षा भाव-तत्व को प्रधानता दी।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया लेख...सटीक जानकारी देता हुआ ....

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  2. कविता तो होती ही भाव का रूप है ……………।बिना भावों के तो सिर्फ़ कोरे शब्द होते हैं जो अन्तस तक नही उतर पाते और ना ही दूसरे के हृदय तक पहुँच पाते……………भावों की गागर मे ही तो कविता का सौन्दय है।

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