गुरुवार, 5 अगस्त 2010

क्षणिकाएं ----- ( ज़िंदगी पर )

 
( १)

ज़िंदगी,
क्या एक सुलगती माचिस नहीं
जो कुछ क्षण सुलगी
और फिर बुझ गयी।

(२)


ज़िंदगी,
एक ऐसी पहेली
जिसका हल ढूँढते - ढूँढते  ही
खत्म हो जाती है पर -
उत्तर नहीं मिलता।

(३)

ज़िन्दगी
शराब का जाम है
जो छलक कर
कुछ क्षणों में
खाली हो जाता है ।

(४)

ज़िन्दगी
गम का दरिया है
जिसमें
चंद लम्हों के
सुख के लिए
इंसान डूब जाता है।

(५)
ज़िन्दगी
दिन का शोर है
जो -
रात की खामोशी में
डूब जाता है।

(६)

ज़िन्दगी
एक पेड़ है
जिस पर -
कभी बहार
तो कभी
पतझड़ है।

(७)

ज़िन्दगी
गुलाब का पौधा है
जिसकी हर शाखा
काँटों से भरी हुई है
फिर भी -
एक गुलाब की खुशबू
हर टहनी में बसी हुई है
.............

29 टिप्‍पणियां:

  1. ज़िंदगी को इतने करीब से देखना भी बड़ी बात है यह काम केवल कुछ लोग ही कर सकते है बधाई हो

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  2. इक जिन्दगी के कितने शेड्स -शुक्रिया !

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  3. बहुत गहन दार्शनिक क्षणिकाएँ.

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  4. इतनी गहन अनुभूति, अभीव्यक्ति, ज़िन्दगी के बारे में, ... आपकी लेखनी को सलाम!

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  5. mumma..ek sher tha....

    zindagi ek sulagtee si chita hai sahir
    shola banti hai na ye bujh ke dhuaan hoti hai ... :)

    aap ki sari kashanikayen alag alag andaz me zindagi ko paribhashit karti hui achhi lageen ...

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  6. सभी क्षणिकाओं में जीवन की
    सुन्दर परिभाषा दी गई है!

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  7. छोटी छोटी कशंकाओं में पूरी जिंदगी समाई है ..
    बहुत सुन्दर.

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  8. ज़िंदगी,
    एक ऐसी पहेली
    जिसका हल ढूँढते - ढूँढते ही
    खत्म हो जाती है पर -
    उत्तर नहीं मिलता।

    जिंदगी की इसी व्याख्या पर गौर किया जाए, तो हम और उलझते जाएंगे!... बहुत सुंदर क्षणिकाएं, धन्यवाद!

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  9. जिन्दगी को बहुत हीह खूबसूरत तरीके से परिभाषित किया है. वाकई इसको जितने रूप में देखो वो शीशे की तरह से उसी रूप में दिखाई देती है और आपने जो रूप देख कर मको देखाए वो काबिले तारीफ है.

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  10. ज़िन्दगी
    दिन का शोर है
    जो -
    रात की खामोशी में
    डूब जाता है।


    yeh waali bahut pasand aayi Mumma......
    saari kshanikaayein badhiyaan.......badhayi..:)

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  11. avarneeye vishay par jitna kuchh likha jaye kam hai...bahut sunder kshanikaao me dhaala aapne zindgi ko.

    bahut badhiya.

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  12. जीवन के विविध आयामों को समेटे इसकी क्षण-भंगुरता पर आपकी निर्मल क्षणिकाएं तो बस देखन में छोटन लगे.... पर घाव करे गंभीर !!" बहुत-बहुत धन्यवाद !!!!

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  13. यह तो बहुत अच्छी रचना है...
    ________________________
    'पाखी की दुनिया' में 'लाल-लाल तुम बन जाओगे...'

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  14. बहुत सुन्दर क्षणिकाये……………सारी ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा समझा दिया।

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  15. ज़िन्दगी की इतनि अच्छी व्याख्य़ा, वह भी क्षणिकाओं के माध्यम से, अद्भुत!

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  16. jindagi ko vibhinna bimbon se dekhane ka andaj sarahiya hai. Bahut hi sundar kavita.

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  17. जीवन की सुन्दर परिभाषा दी है!

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  18. बहुत दिनों के बाद इतनी अच्छी क्षणिकाएँ पढने को मिली , आपको धन्यवाद और शुभकामनायें..

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  19. गहरी सोच , गहन अनुभुति. बहुत अच्छा लगा.

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  20. आखिरी क्षणिका में जिंदगी का सार है ।
    बढ़िया ।

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  21. जिंदगी के अनेक रंग एक ही केनवास पर !!!!!

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  22. हर क्षणिका बहुत सुन्दर है और मन को आंदोलित कर जाती है ! इतनी प्यारी रचना के लिये बहुत सारी बधाई आपको !

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