मंगलवार, 26 जून 2012

आज मुझसे बोल, बादल

आज मुझसे बोल, बादल


हरिवंशराय बच्चन

आज मुझसे बोल, बादल!

तम-भरा तू, तम-भरा मैं,
ग़म-भरा तू, ग़म भरा मैं,
आज तू, अपने हृदय से हृदय मेरा तोल, बादल!
आज मुझसे बोल, बादल!

आग तुझमें, आग मुझमें,
राग तुझमें,   राग मुझमें,
आ मिलें हम आज अपने द्वार उर के खोल, बादल!
आज मुझसे बोल, बादल!

भेद यह मत देख दो पल --
क्षार जल मैं, तू मधुर जल,
व्यर्थ मेरे अश्रु , तेरी बूंद है अनमोल, बादल!
आज मुझसे बोल, बादल!

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15 टिप्‍पणियां:

  1. बच्चन जी की सुंदर हृदय अभिव्यक्ति ...
    आभार पढ़वाने के लिये ...

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  2. bahut accha laga harivansh rai bachchan ki kavita padhkar .....manoj jee mera blog aapki pratiksha me hai.....

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  3. बहुत सुन्दर, बहुत कोमल गीत
    लाजवाब

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  4. भेद यह मत देख दो पल --
    क्षार जल मैं, तू मधुर जल,
    व्यर्थ मेरे अश्रु , तेरी बूंद है अनमोल, बादल!
    आज मुझसे बोल, बादल!
    माधुर्य के कवि बच्चन जी को पढ़ना एक आनंद है सदैव .पढ़ते हुए इस गीत को याद आ गईं पंक्तियाँ -मैं नीर भरी दुःख की बदली ....शुक्रिया मनोज जी .
    वीरुभाई ,४३,३०९ सिलार वुड ड्राइव ,कैंटन ,मिशिगन ४८ ,१८८ ,यू. एस. ए .

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  5. बहुत सुंदर... वाह!
    अनुपम रचना पढ़वाने के लिए सादर आभार।

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  6. पहली बार पढ़ी यह रचना..आभार.

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  7. बहुत सुंदर कविता पढ़वाने के लिए आभार

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  8. behtarin rachna tak pahuchaane ke hardik abahar...sadar badhayee ke sath

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  9. एक सुन्दर गीत पढवाने का बहुत बहुत आभार...

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  10. हरिवंश राय बच्चन जी की कविताओं में मन के भावों की जो प्रांजलता स्वत: ही मुखरित होती है, उसके भाव किसी भी साहित्य प्रेमी को उसमें उलझाने के लिए बाध्य कर देती हैं। उनकी यह कविता काफी अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  11. बच्चन जी की कवितायें एकदम मन को छा लेती हैं -आभार !

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  12. बहुत बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  13. इतनी सुन्दर कविता पढवाने के लिए बहुत बहुत आभार

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