शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

दोहवाली .... भाग - 22 / संत कबीर




जन्म  --- 1398

निधन ---  1518


पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात
देखत ही छिप जाएगा, ज्यों सारा परभात 211


पाहन पूजे हरि मिलें, तो मैं पूजौं पहार

याते ये चक्की भली, पीस खाय संसार 212



पत्ता बोला वृक्ष से, सुनो वृक्ष बनराय

अब के बिछुड़े ना मिले, दूर पड़ेंगे जाय 213



प्रेमभाव एक चाहिए, भेष अनेक बजाय

चाहे घर में बास कर, चाहे बन मे जाय 214



बन्धे को बँनधा मिले, छूटे कौन उपाय

कर संगति निरबन्ध की, पल में लेय छुड़ाय 215



बूँद पड़ी जो समुद्र में, ताहि जाने सब कोय

समुद्र समाना बूँद में, बूझै बिरला कोय 216



बाहर क्या दिखराइये, अन्तर जपिए राम

कहा काज संसार से, तुझे धनी से काम 217



बानी से पहचानिए, साम चोर की घात

अन्दर की करनी से सब, निकले मुँह की बात 218



बड़ा हुआ सो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर

पँछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर 219



मूँड़ मुड़ाये हरि मिले, सब कोई लेय मुड़ाय

बार-बार के मुड़ते, भेड़ बैकुण्ठ जाय 220


12 टिप्‍पणियां:

  1. संगीता जी कबीर के कई दोहे पहली बार पढ रही हूँ । आभार आपका । पहले दोहे में सारा की जगह तारा है । ज्यों तारा परभात । जिस तरह प्रभात होने पर तारा छिप जाता है ।

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  2. बहुत सुन्दर दोहे है दी.....
    कबीर के दोहे समझने में आसान होते हैं..शायद आम जनमानस तक इसीलिए पहुंचे हैं ये...

    आभार
    अनु

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  3. तब से आज तक कबीर दूसरा ना हुआ ...

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  4. मूँड़ मुड़ाये हरि मिले, सब कोई लेय मुड़ाय ।

    बार-बार के मुड़ते, भेड़ न बैकुण्ठ जाय ॥ 220 ॥

    बहुत सार्थक दोहे ...!!
    आभार दी ..

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  5. बानी से पहचानिए, साम चोर की घात ।

    अन्दर की करनी से सब, निकले मुँह की बात ॥ 218 ॥



    बड़ा हुआ सो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।

    पँछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ॥ 219 ॥

    आह ..कितना सच सच..

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  6. कबीर के दोहों का सुन्दर संकलन किया है .आभार

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  7. कबीर दोहावली शृंखला सुंदर लग रही है...एक सुंदर आयोजन.

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  8. कबीर मेरे आत्मिक कवि हैं...
    कबीर दोहावली श्रंखला के लिए आभार...

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  9. जीवन माया राग है, क्षणभर की हर शान।
    कबिरा संगत साँच की, अमृत बहे जुबान।


    सादर आभार।

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  10. खरगोश का संगीत राग रागेश्री
    पर आधारित है जो कि खमाज
    थाट का सांध्यकालीन
    राग है, स्वरों में कोमल निशाद और बाकी
    स्वर शुद्ध लगते हैं, पंचम इसमें वर्जित है,
    पर हमने इसमें अंत में पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता है.
    ..

    हमारी फिल्म का संगीत वेद नायेर ने दिया है.
    .. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में चिड़ियों कि
    चहचाहट से मिलती है.
    ..
    Feel free to visit my web-site संगीत

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