सोमवार, 4 जुलाई 2011

चंद अशआर नुमा नज़्म


पलकों पे जो ये अश्क चले आते हैं,
ये कितने बेदर्द हो कर चले आते हैं,
जब छोड़ देता है साथ ज़माना मेरा
तो ये भी मेरा साथ छोड़ कर चले आते हैं।



दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है
अश्कों को भी सबसे छुपाने की आदत है
लोग समझते हैं कि गम नहीं है ज़माने में कोई मुझे
क्यों कि गम को भी पी जाने की मुझे आदत है
 



दिल के पायदान पे
कदम रख
तेरे अक्स ने
दस्तक दी है
अब मुझे

आफताब औ महताब भी
अज़ीज़ नहीं .


ख़ामोशी के घुंघरू भी
करते हैं बहुत शोर
कभी कभी
महफ़िल में भी
तन्हाई होती है
चारों ओर .

संगीता स्वरुप

19 टिप्‍पणियां:

  1. 'कभी कभी
    महफ़िल में भी
    तन्हाई होती है
    चारों ओर'
    .....................गहन भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति
    ...............सभी नज्में भावपूर्ण-अर्थपूर्ण

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  2. kya bat hai?
    bahut sundar prastuti.
    andaaj nirala hai kyonki aap khud hi nirali hain.

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  3. दिल के पायदान पे
    कदम रख
    तेरे अक्स ने
    दस्तक दी है
    अब मुझे
    आफताब औ महताब भी
    अज़ीज़ नहीं .
    ........kya kahne hain

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  4. आज तो गज़ब कर दिया………सभी एक से बढकर एक है क्षणिकायें।

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  5. क्या बात है आज तो महफ़िल शायरी से जमी है.
    बहुत बढ़िया शेर हैं सभी.

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  6. वाह वाह , हम भी क़द्र दान है .फडफडाते शेर .मस्त .

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  7. लोग समझते हैं कि गम नहीं है ज़माने में कोई मुझे
    क्यों कि गम को भी पी जाने की मुझे आदत है
    वाह रचना बहुत अच्छी लगी। आभार।

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  8. ख़ामोशी के घुंघरू भी
    करते हैं बहुत शोर
    कभी कभी
    महफ़िल में भी
    तन्हाई होती है
    चारों ओर
    - वाह ,वाह वाह!

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  9. बहुत खूब!!
    यह प्रयोग भी सुन्दर लगा!!

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  10. सारी क्षणिकायें एक से बढ़ कर एक हैं संगीता जी ! लाजवाब लेखन के लिये अनेक बधाइयाँ !

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  11. सभी क्षणिकायें मर्म स्पर्शी.
    खुशियों की बारात न लाई ,ये कैसी शहनाई है.
    सन्नाटे में शोर बहुत - महफिल में तन्हाई है.

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  12. ख़ामोशी के घुंघरू भी
    करते हैं बहुत शोर
    कभी कभी
    महफ़िल में भी
    तन्हाई होती है
    चारों ओर .

    हृदयस्पर्शी...... बहुत सुंदर पंक्तियाँ

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  13. ख़ामोशी के घुंघरू भी
    करते हैं बहुत शोर
    कभी कभी
    महफ़िल में भी
    तन्हाई होती है
    चारों ओर .
    wah sangeetaji kya chadikayen likhi hai aapne.saari dil ko choo gai.bahut bahut badhaai aapko.

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  14. shukriya ya aabhaar jaise shabd bahut halkapan de jate hain....isliye charcha ke liye aapke apnatv ko naman......

    aapka ye blog bhi achcha hai....maine der se dekha....rachnaen to aapki hoti hi achchi hain.....

    :):)

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  15. वाह!! एक से बढ़कर एक...बेहतरीन.

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  16. दिल के पायदान पे
    कदम रख
    तेरे अक्स ने
    दस्तक दी है
    अब मुझे
    आफताब औ महताब भी
    अज़ीज़ नहीं

    वाह... बहुत सुंदर... सभी एक से बढ़कर एक लगीं...आपको पहली बार पढ़ा है ..अच्छा लगा...


    आभार..

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