![]() खामोशियाँ जब बोलती हैं ज़ेहन का वर्क - दर- वर्क खोलती हैं होठ हिलते नहीं हैं मगर मन ही मन ना जाने कितने राज़ खोलती हैं आँखों में उतर आते हैं कितने ही सैलाब जब खामोश लब बोलते हैं लफ्ज़ जुबां से निकलते नहीं फिर भी तास्सुरात चेहरे के बोलते हैं . आज मेरे तुम्हारे दरमियान पसरी है सन्नाटे की चादर जिस पर मेरी खामोशी ने लिख दी है एक इबारत . इबारत की खामोशी को खामोश ही रहने दो मुझे आज खुद से खुद को कुछ कहने दो | संगीता स्वरुप |

खामोशी की अभिव्यक्ति!!!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंइबारत की खामोशी को
खामोश ही रहने दो
मुझे आज खुद से
खुद को कुछ कहने दो |
khamoshi ki juban sabse takatvar hoti hai.....bahut badhya prastuti
प्रत्युत्तर देंहटाएंख़ामोशी की गहराइयों को बख़ूबी व्यक्त किया है !
प्रत्युत्तर देंहटाएंखामोशियाँ
प्रत्युत्तर देंहटाएंजब बोलती हैं
ज़ेहन का
वर्क - दर- वर्क
खोलती हैं
होठ हिलते नहीं हैं
मगर
मन ही मन
ना जाने कितने
राज़ खोलती हैं
..........
मेरी खामोशी ने
लिख दी है
एक इबारत .
इबारत की खामोशी को
खामोश ही रहने दो
मुझे आज खुद से
खुद को कुछ कहने दो |.... jo kahiye use phir hamen padhaiye
खामोशियाँ
प्रत्युत्तर देंहटाएंजब बोलती हैं
ज़ेहन का
वर्क - दर- वर्क
खोलती हैं
खामोश रहने से बोल को वजन मिलता है ...और जब ख़ामोशी बोलती है ....तो निशब्द ही करती है ...सुनने वाले को ...
सुंदर रचना ...
इबारत की खामोशी को
प्रत्युत्तर देंहटाएंखामोश ही रहने दो
मुझे आज खुद से
खुद को कुछ कहने दो |
...खूबसूरत पंक्तियां ..मन को छू गई..बधाई.
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शब्द-शिखर / विश्व जनसंख्या दिवस : बेटियों की टूटती 'आस्था'
आज आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....
प्रत्युत्तर देंहटाएं...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
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बेहतरीन कविता है.
प्रत्युत्तर देंहटाएं----------
कल 12/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
भावुक कर देने वाली कविता... बहुत सुन्दर
प्रत्युत्तर देंहटाएंइबारत की खामोशी को
प्रत्युत्तर देंहटाएंखामोश ही रहने दो
मुझे आज खुद से
खुद को कुछ कहने दो |
वाह्…………खुद से खुद को जब कह दिया जाये तो सारा अवसाद बह जाता है………बहुत खूब
sundar bhavabhivykti, bahut khoobsurat prastuti
प्रत्युत्तर देंहटाएंख़ामोशी बोलती है तो कायनात सुनती है . सुँदर अभिव्यक्ति .
प्रत्युत्तर देंहटाएंख़ामोशी की गहराइयों को बख़ूबी व्यक्त किया है !
प्रत्युत्तर देंहटाएं..खूबसूरत पंक्तियां ..मन को छू गई..बधाई.
ख़ामोशी का भी अपना ही महत्व है.
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत भावुक रचना.
Adbhut , adbhut..
प्रत्युत्तर देंहटाएंशिखा जी की बात से पूर्ण तह सहमत हूँ। की खामोशी का अपना ही महत्व है। भावनात्मक प्रस्तुती....
प्रत्युत्तर देंहटाएंलफ्ज़ जुबां से निकलते नहीं ,फिर भी तास्सुरात चेहरे के बोलतें हैं ....बहुत खूब ....चित्र ....को सांगीतिक छंद देता मौन का नाद .
प्रत्युत्तर देंहटाएंकहते हैं एक खामोशी हज़ारों लफ़्ज़ों की तर्जुमानी करते हैं.. और जब मोहब्बत की बातें हों तो
प्रत्युत्तर देंहटाएंये खामोशियाँ, ये तन्हाइयां
मोहब्बत की दुनिया है कितनी जवाँ!!
बहुत सुन्दर रचना, संगीता दी!!
खामोशी अभिव्यक्ति का बहुत ही सशक्त माध्यम है। सशक्त अभिव्यक्ति।
प्रत्युत्तर देंहटाएंइबारत की खामोशी को
प्रत्युत्तर देंहटाएंखामोश ही रहने दो
मुझे आज खुद से
खुद को कुछ कहने दो |
एक अनुपम अनुभूति है और उसकी अनुपम अभिव्यक्ति है ! इतनी सशक्त एवं सार्थक रचना कई दिनों के बाद पढ़ने के लिये मिली ! मेरी बधाई स्वीकार करें !
कभी-कभी कोई काम हजार शब्दों में नहीं होता वह एक खामोशी में कॊ जाता है।
प्रत्युत्तर देंहटाएंखामोशी का अद्भुत चित्र,अतुलनीय.
प्रत्युत्तर देंहटाएंइबारत की खामोशी को
प्रत्युत्तर देंहटाएंखामोश ही रहने दो
मुझे आज खुद से
खुद को कुछ कहने दो |
ख़ामोशी की अपनी भाषा होती है, उसके अहसास को वही कर सकता है जिसने ये भाषा खुद गढ़ी है.
अपने अहसास और अपने शब्द एक नई रचना कर जाते हैं और वो सबके लिए दिल छूने वाली होती है.
बहुत सुंदर .
इबारत की खामोशी को
प्रत्युत्तर देंहटाएंखामोश ही रहने दो
मुझे आज खुद से
खुद को कुछ कहने दो |
खामोशी को बहुत खूबसूरत शब्दों में मुखरित किया है आपने...
मुझे आज खुद से
प्रत्युत्तर देंहटाएंखुद को कुछ कहने दो |
सुंदर!